इंदौर में दिन का पारा 38°C पर स्थिर, रातों की गर्मी बढ़ी; 24 घंटे में तापमान 7 डिग्री उछला
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। टर्फ लाइन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में कहीं-कहीं बारिश हो रही है। हालांकि इंदौर में पिछले दो दिनों से बारिश नहीं हुई है, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से रात के तापमान में तेजी से इजाफा हुआ है। यही कारण है कि दिन में मौसम अपेक्षाकृत सुहाना महसूस हो रहा है, जबकि रात में गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है।
इस वर्ष नौतपा के दौरान भी गर्मी का असर अपेक्षाकृत कम रहा। पूरे नौ दिनों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं पहुंचा। नौतपा के अंतिम दिनों में हुई बारिश ने भी तापमान को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाई। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में भी प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी, जिससे बीच-बीच में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी।
मानसून की बात करें तो सामान्य तौर पर मध्यप्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश करता है। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को प्रदेश में पहुंचा था। लेकिन इस बार इसके 5 से 7 दिन देरी से आने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच हो सकती है। आमतौर पर केरल में मानसून पहुंचने के करीब 15 दिन बाद मध्यप्रदेश में इसका आगमन होता है, लेकिन कई बार मौसमीय परिस्थितियों के कारण इसमें विलंब भी हो जाता है।
इंदौर के मौसम का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। जून महीने में यहां तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलती है। पिछले सात वर्षों में जून के दौरान अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। पिछले वर्ष जून में शहर में साढ़े पांच इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। वहीं वर्ष 1980 में जून माह में 17 इंच से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना था। 23 जून 2003 को 24 घंटे में पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी, जबकि 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम के ये आंकड़े बताते हैं कि जून का महीना इंदौर में गर्मी और बारिश के बीच संतुलन बनाने वाला दौर साबित होता है।
