August 25, 2026

हनी ट्रैप-2 की परतें खुलीं, ब्लैकमेलिंग नेटवर्क पर शिकंजा; कोर्ट में पेश हुए अहम सबूत

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 मध्य प्रदेश । इंदौर के बहुचर्चित हनी ट्रैप-2 मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। बिल्डर और शराब कारोबारी चिंटू उर्फ हितेंद्र ठाकुर को कथित रूप से ब्लैकमेल कर रकम वसूलने के मामले में गिरफ्तार सागर निवासी रेशू चौधरी और हनी ट्रैप-1 की मुख्य आरोपी श्वेता जैन को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच ने कोर्ट को बताया कि दोनों महिलाओं से जुड़ा गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था और बाद में ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली करता था।

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों के कब्जे से कुल 9 मोबाइल फोन, एक स्पाई कैमरा, पावर बैंक, 32 जीबी का मेमोरी कार्ड और दो पेन ड्राइव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों से भी मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ऐसे अहम डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं, जो पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

मामले में गिरफ्तार लेडी शराब तस्कर अलका दीक्षित, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा और जयदीप ने जमानत के लिए कानूनी प्रयास शुरू कर दिए हैं। लाखन चौधरी की ओर से दायर जमानत याचिका का क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अदालत में विरोध किया। वहीं पुलिस ने अलका दीक्षित से आगे की पूछताछ के लिए अतिरिक्त रिमांड की मांग भी की है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि मामला केवल फरियादी चिंटू ठाकुर तक सीमित नहीं है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कई अन्य प्रभावशाली और संपन्न लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है। जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस की प्रारंभिक जांच में रेशू चौधरी, श्वेता जैन, अलका दीक्षित और हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा के बीच संवेदनशील फोटो और जानकारी साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी किसी अन्य व्यक्ति का नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया है।

जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रेशू चौधरी के पास से बरामद स्पाई कैमरा माना जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि इस कैमरे का उपयोग गुप्त रिकॉर्डिंग करने के लिए किया जाता था। कैमरे के साथ मिला 32 जीबी का मेमोरी कार्ड और अन्य स्टोरेज डिवाइस अब फॉरेंसिक जांच के दायरे में हैं। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि रिकॉर्ड किए गए फोटो और वीडियो किन-किन डिवाइस में सुरक्षित रखे गए थे और कहीं कोई डेटा डिलीट तो नहीं किया गया।

क्राइम ब्रांच की विभिन्न टीमें मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं और कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस की नजर जब्त मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड में मौजूद डेटा पर है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय कर सकता है।

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