वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने
जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को 21 जून 2025 को लसूडिया पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास लावारिस हालत में रेस्क्यू किया था। उस समय वह गर्भवती थी और उसकी पहचान या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। ऐसे में प्रशासन ने उसे संरक्षण देते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की थी ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित माहौल में हो सके।
कुछ ही समय बाद जुलाई 2025 में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद मां और बेटा दोनों प्रेमाश्रय में ही साथ रह रहे थे। आश्रय गृह में मौजूद लोग बताते हैं कि मां अपने बेटे की देखभाल करती थी और बच्चा भी पूरी तरह उसी पर निर्भर था। दोनों का जीवन सीमित संसाधनों के बावजूद एक-दूसरे के सहारे चल रहा था।
लेकिन प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे आश्रय गृह को खाली कराने का फैसला लिया। इस दौरान वहां रह रहे सभी बुजुर्गों और आश्रितों को अलग-अलग आश्रय गृहों तथा अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को दूसरे आश्रय गृह भेज दिया गया जबकि उसका एक साल का बेटा प्रेमाश्रय में ही रह गया। इस तरह प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मां और बेटा एक-दूसरे से अलग हो गए।
वृद्धाश्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे को समय पर दूध और अन्य आवश्यक भोजन दिया जा रहा है तथा उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही। इसके बावजूद जब भी उसे मां की गोद नहीं मिलती वह रोने लगता है और काफी देर तक बेचैन रहता है। उसे चुप कराने और बहलाने की कोशिश की जाती है लेकिन मां का स्नेह और स्पर्श किसी भी व्यवस्था से पूरा नहीं हो पा रहा। उसकी मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाशती दिखाई देती हैं।
इस घटना ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। उनका कहना है कि एक वर्ष की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां के स्नेह और देखभाल पर निर्भर होता है। ऐसे में लंबे समय तक दोनों का अलग रहना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मां और बेटे को फिर से एक साथ रखा जा सके।
यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलू का भी है। जहां एक ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है वहीं दूसरी ओर ऐसे मासूम बच्चों और असहाय महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मां और बेटे को दोबारा मिलाने के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।
