दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी
दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जीत का भरोसा जताने वाले नेताओं के सुर नतीजे आने के बाद बदल गए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि दतिया पहले भी कांग्रेस की सीट थी और अब भी कांग्रेस के पास ही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार करीब सत्रह सौ वोट अधिक मिले हैं। वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उपचुनाव भले ही आम चुनाव जितने महत्वपूर्ण नहीं होते लेकिन हार को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
उपचुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा भी चर्चा के केंद्र में आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान उनका भावुक होना काफी चर्चा में रहा था। हार के बाद विपक्ष ने भीतरघात के आरोप लगाए और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी का असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कहा कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी पार्टी के कार्यकर्ता थे और आगे भी कार्यकर्ता ही रहेंगे। उनकी केवल एक अभिलाषा है कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी दे उसे पूरी निष्ठा से निभाने का अवसर मिले। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा नेतृत्व भविष्य में उन्हें कौन सी भूमिका सौंपता है।
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए जनादेश का सम्मान किया। मीडिया से बातचीत के दौरान वे भावुक भी नजर आए। भीतरघात से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पार्टी के खिलाफ काम किया है तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए क्योंकि भाजपा को मां मानने वाले कार्यकर्ता से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि पार्टी की पहचान अनुशासन और सेवा भाव से है इसलिए व्यक्तिगत नाराजगी को संगठन से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे चुनाव की समीक्षा करेगी और यदि कोई कार्यकर्ता अनुशासनहीनता या भीतरघात का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
**सूत्रों के अनुसार भाजपा ने चुनाव के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए हैं और उन्हें संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक भेजा गया है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होने के बाद दतिया से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों की शुरुआत माना जा रहा है। कांग्रेस जहां इस जीत से उत्साहित होकर इसे आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का आधार बना रही है वहीं भाजपा हार के कारणों का विश्लेषण कर संगठन को और मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है। दोनों दलों के लिए यह परिणाम आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
