बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था पर आवामी लीग का हमला, यूनुस और बीएनपी सरकारों पर राज्य विफलता का आरोप
पार्टी ने आरोप लगाया कि अंतरिम प्रशासन से लेकर वर्तमान बीएनपी सरकार तक किसी भी शासन ने हालात को सामान्य बनाने में प्रभावी भूमिका नहीं निभाई। उसके अनुसार दोनों सरकारों ने कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का समाधान करने के बजाय असाधारण प्रशासनिक शक्तियों को उचित ठहराने के लिए जनता के बीच फैली असुरक्षा का इस्तेमाल किया। आवामी लीग का कहना है कि इससे सामाजिक स्तर पर अव्यवस्था बढ़ी और स्थानीय स्तर पर आपराधिक समूहों तथा भीड़तंत्र को बढ़ावा मिला।
आवामी लीग ने दावा किया कि सबसे अधिक असर धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है। पार्टी के अनुसार कई इलाकों में अल्पसंख्यक समुदायों के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। साथ ही संपत्तियों पर अवैध कब्जे, धमकियों और यौन हिंसा जैसी घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। पार्टी का आरोप है कि पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।
पार्टी ने कहा कि वर्ष 2025 के दौरान सांप्रदायिक हिंसा, मौतों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की अनेक घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में भी ऐसी घटनाओं के जारी रहने का दावा किया गया है। आवामी लीग का कहना है कि इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई की कमी के कारण दोषियों का मनोबल बढ़ा है और प्रभावित समुदायों में भय का माहौल बना हुआ है।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर भी पार्टी ने चिंता जताई है। उसके अनुसार बलात्कार, यौन उत्पीड़न और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पार्टी का दावा है कि कई मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित, पड़ोसी, रिश्तेदार या शिक्षक रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक हिंसा, भीड़ द्वारा हत्याएं, पत्रकारों और शिक्षकों पर हमले तथा जमीन कब्जाने की घटनाएं एक समान पैटर्न को दर्शाती हैं। पार्टी के अनुसार इन मामलों में कमजोर जांच, राजनीतिक हस्तक्षेप और न्याय मिलने में देरी जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उसका कहना है कि आम नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और लोग शाम के बाद बाहर निकलने से भी परहेज करने लगे हैं।
पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। उसका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पक्षों को सरकार से जवाबदेही तय करने की अपेक्षा करनी चाहिए। वहीं, इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस रिपोर्ट के समय तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
