September 23, 2026

Uttarakhand samachar: भाजपा की होगी वापसी या कांग्रेस बनाएगी सरकार?

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  • उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती शुरू

देवभूमि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 2027 के फरवरी-मार्च में होने वाले इन चुनावों को लेकर जहां बीजेपी तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति तैयार कर रही है, तो वहीं, कांग्रेस की ओर से अपने बड़े नेताओं के दौरे और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित प्लान तैयार किया जा रहा है।

चुनाव को लेकर उत्तराखंड में तकरीबन हर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी है। अपनी जीत के लिए हर दल और नेता हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जहां भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश करेगी, तो वहीं कांग्रेस भी वापसी के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इस बीच कई नेता तो अभी से जमीन तैयार करने में जुट गए हैं, जबकि कई टिकट की जुगत में लग गए हैं।

बीजेपी की स्थिति कुछ सीटों पर है काफी मुश्किल भरी
नैनीताल क्षेत्र की कालाढूंगी सीट इस बार भाजपा के लिए काफी मुश्किल भरी रहने की संभावना है। दरअसल एक ओर जहां जनता भाजपा से बेहद नाराज दिख रही है तो वहीं वर्तमान विधायक को लेकर नाराजगी और विरोध कम होता नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र में नहीं हुआ विकास यहां मुख्य मुद्दा तो है ही साथ ही बिना विजन के कराए गए कार्य भी जनता में आक्रोष पैदा कर रहे हैं।

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इस दिन समाप्त हो रहा उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल
ज्ञात हो कि उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की संभावना जताई जा रही है। यूं तो चुनाव आयोग आधिकारिक तारीखें मतदान से करीब 60 दिन पहले घोषित करता है, पर उससे पहले ही प्रदेश में जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो चुकी है।

बताते चलें कि साल 2022 के चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला था और पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने थे। ऐसे में अब 2027 में बीजेपी हैट्रिक की तैयारी में है। जिसके मद्देनजर बीजेपी ने 2027 के चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने देहरादून और हल्द्वानी में बैठकें कर 7 एजेंडे तय किए हैं और हारी हुई 23 सीटों पर विशेष फोकस की रणनीति बनाई है।

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साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान हारी 23 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान रखा जा रही है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सांसदों को इन सीटों की जिम्मेदारी सौंपने की योजना है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार से मिले विकास कामों, योजनाओं और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को प्रचार में प्रमुखता से उठाने की रणनीति है।

इसके साथ ही सेवा संकल्प अभियान, जन-जन की सरकार अभियान, डिजिटल प्रशिक्षण और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के प्रवास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं पार्टी की आंतरिक सर्वे भी जारी है, जिससे जिताऊ चेहरों को ही टिकट दिया जाए।

कांग्रेस की खास रणनीति
कांग्रेस भी आगामी 2027 के चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपनी रणनीति बना रही है। पार्टी ने इंटरनल सर्वे भी कराया है। जिसके आधार पर कांग्रेस सीटों की ताकत, संगठन, उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों का फीडबैक लेकर चुनावी रणनीति बनाएगी। साथ ही राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड दौरे की योजना बनाई है। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आ रही है कि इस बार कांग्रेस कुछ ऐसे मुद्दों को एक निश्चित समय पर उठाने की योजना बना रही है जिसे बीजेपी संगठन भूल चुका है या ठंडे बस्ते में डाल चुका है। ऐसे में यह योजना बीजेपी के लिए विशेष सिरदर्द बन सकती हैै।

इससे पहले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पहले भी ये कह चुके हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें भरोसा दिया है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खड़गे उत्तराखंड में कई दौरे करेंगे।

बीजेपी और कांग्रेस के सामने चुनौतियां
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीसरी बार सत्ता में लौटने के लिए एंटी-इनकंबेंसी से बचना और विकास कार्ड को बेहतर ढंग से जनता तक पहुंचाना है, तो वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती है कि हर बार चुनाव के समय बड़े नेताओं का एक मंच पर न दिखना और आंतरिक अंतर्कलह माना जा रहा है। ऐसे में अगले कुछ महीनों में दोनों पार्टियां अपने-अपने अभियान में तेजी लाएंगी।

एक ओर जहां बीजेपी सेवा संकल्प और विकास कार्ड के साथ जनता के बीच जाएगी। तो वहीं कांग्रेस बड़े नेताओं के दौरे और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित प्रचार करेगी। कुल मिलाकर चुनाव आयोग की ओर से चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद ही असली चुनावी माहौल गर्माएगा, लेकिन फिलहाल दोनों पार्टियों की तैयारियां जोरों पर हैं।

 

 

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