Uttarakhand Election 2027: विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादलों की तैयारी
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25 नवंबर तक आयोग को देनी होगी रिपोर्ट
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए शासन ने निर्वाचन कार्यों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा। वहीं, पिछले चार वर्षों में किसी एक जिले में तीन साल या उससे अधिक समय पूरा कर चुके अधिकारियों का भी तबादला किया जाएगा।
बड़े तबादलों की तैयारी: उत्तराखंड 2027 के चुनावों से पहले
राज्य सरकार को 25 नवंबर 2026 तक स्थानांतरण संबंधी कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भारत निर्वाचन आयोग को सौंपनी है। इस समयसीमा को देखते हुए प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस विभागों में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।
चुनाव से जुड़े अधिकारी: गृह जिले में तैनात नहीं रह सकेंगे
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा। इसके अलावा जिन अधिकारियों ने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले में तीन साल या उससे अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें भी स्थानांतरित किया जाना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव के दौरान किसी तरह के स्थानीय प्रभाव या पक्षपात की आशंका को कम करना और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना है।
नियम: किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होंगे?
यह स्थानांतरण नीति मुख्य रूप से उन अधिकारियों पर लागू होगी, जिनकी चुनाव प्रक्रिया में सीधी भूमिका रहती है। इनमें शामिल हैं:
जिला प्रशासन: जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, एसडीएम और तहसीलदार।
पुलिस विभाग: एसएसपी, एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर।
परिवहन विभाग: आरटीओ और एआरटीओ।
नगर निकाय एवं विकास प्राधिकरण: चुनाव कार्यों से जुड़े प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारी।
आबकारी विभाग: उपनिरीक्षक और उससे ऊपर के अधिकारी।
इन अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाएंगे।
छूट: किन कर्मचारियों को मिल सकती है?
निर्देशों के मुताबिक, चिकित्सा, शिक्षा और इंजीनियरिंग जैसे विभागों में तैनात ऐसे कर्मचारियों को इस नीति से छूट दी गई है, जिनका निर्वाचन कार्यों से सीधा संबंध नहीं है। राज्य मुख्यालयों में तैनात ऐसे कर्मचारियों पर भी यह नियम लागू नहीं होगा, जिनकी चुनाव प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
चुनाव ड्यूटी पर रोक: आपराधिक और अनुशासनिक मामलों वाले अधिकारियों की
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, जिन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में आपराधिक मामले लंबित हैं या जिनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है, उन्हें चुनाव ड्यूटी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
अनुपालन रिपोर्ट: 25 नवंबर तक आयोग को देनी होगी
उत्तराखंड शासन को 25 नवंबर 2026 तक स्थानांतरण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट भारत निर्वाचन आयोग को सौंपनी है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासनिक और पुलिस विभागों में तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले होने वाली यह कवायद प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव ला सकती है। अब निगाहें शासन की ओर से जारी होने वाली तबादला सूची और आयोग को भेजी जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट पर रहेंगी।
Uttarakhand Prepares for Major Administrative Transfers Ahead of 2027 Assembly Elections
