June 5, 2026

Haldwani samachar: हल्द्वानी के जीवन जोशी, महिलाओं को बना रहे स्वाबलंबी

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ट्रेनिंग-02
  • प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के 122वें एपिसोड में नाम लेकर की थी प्रशंसा

बगेट कला के महारथी हल्द्वानी के जीवन जोशी का नाम उस समय चर्चाओं में आया था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के 122वें एपिसोड में उनका नाम लेकर उनके कार्यों के बारे में बताया था।

उत्तराखंड की कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत रहने वाले जीवन जोशी एक बार फिर चर्चाओं में हैं। वे इन दिनों महिलाओं को बगेट कला के माध्यम से स्वाबलंबी बनाने में जुटे हुए हैं। इसके तहत वे क्षेत्र की करीब 11 महिलाओं को पिछले करीब 8 माह से लगातार मुफ्त में ट्रेनिंग देकर बगेट कला की बारिकियों को सीखा रहे हैं। रोहणी बैंकेट हाल के पीछे हर रोज करीब 3 घंटे तक टीन की चादर के ​नीचे बने अधूरे निर्माण में ट्रेनिंग लेने आने वाली इन महिलाओं को वे वहां तक आने जाने का खर्चा भी देते हैं।

ट्रेनिंग के लिए आने वाली ये महिलाएं नंदपुर कटघरिया,हिम्मतपुर मल्ला,उंचापुल, हैडाखान मंदिर, फतेहपुर, रोहिणी आदि क्षेत्रों से आती हैं। ट्रेनिंग ले रही महिलाओं के अनुसार वे जोशी जी से पुर्व में एक ट्रेनिंग कार्यक्रम के दौरान मिली थीं, वहीं से प्रेरणा पाकर वे उनसे जुड़ी और अब बगेट कला को सीख कर स्वरोगार की दिशा में बढ़ रही हैं। ममता जोशी, उमा पाठक व अन्य महिलाओं के अनुसार चुंकि ये चीजें पेड़ की गिरी हुई लकड़ी से बनाई जाती है तो हम इसके माध्यम से पर्यावरण बचाव में अपना योगदान भी दे रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि हम काफी हद तक तो इस कला से चीजें बनाने सीख चुके हैं, अब इनकी फीनिशिंग सीख रहे हैं।

 

ये महिलाएं ले रही हैं ट्रेनिंग…
ममता जोशी (नन्दपुर कटघरिया), ममता भट्ट (नन्दपुर कटघरिया), पुष्पा अवस्थी (हिम्मतपुर मल्ला), ममता जोशी (भगवानपुर ब्लाक), भावना(पानपुर, कटघरिया), उमा पाठक (ऊँचापुल, हिम्मतपुरमल्ला), कमला (ऊँचापुल, हिम्मतपुरमल्ला), सोनी जोशी (हेडाखान मंदिर), कविता बसेडा (ऊँचापुल), प्रेमा (फतेहपुर), कविता (रोहिणी, कटघरिया)

 

वहीं कार्य में आ रही दिक्कतों के संबंध में महिलाओं का कहना है कि हमें ट्रेनिंग सेंटर की जरूरत है। क्योंकि वर्तमान जिसमें हम सीख रहे हैं ये कई जगह से खुला हुआ है। ऐसे में फीनिशिंग से पहले तक यहां बनाकर रखी गई चीजों के बारिश या अन्य कारणों से खराब होने का डर बना रहता है। इसके अलावा उपर की छत टीन की है, जो गर्मी में भयंकर तपती है, ऐसे में यहां बैठ कर काम करना मुश्किल हो जाता है।

कौन क्या बोला…

यहां हमने चीड़ के बगेट से कलाकृतियां बनाना सीखा, इसे हम आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह पर्यावरण बचाव का भी साधन है।

     – ममता जोशी (नन्दपुर कटघरिया)

हम लोग काफी कुछ बनाना सीख गए हैं यहां हर रोज सर की देख रेख में 3 घंटे कार्य करते हैं। इतने दिनों की मेहनत के बाद अब बनाना तो आ गया है, अब फिनीशिंग सीख रहे हैं।

पुष्पा अवस्थी (हिम्मतपुर मल्ला)

जीवन सर हमें एक टीम बनाकर आगे बढ़ा रहे हैं। ये ट्रेनिंग कार्य भी इनकी हिम्मत से ही संभव हुआ है। इन्होंने ने ही हममें इस ओर रुचि पैदा की ओर अब हमें ये सब अपनी तरफ से सीखा भी रहे हैं।

उमा पाठक (ऊँचापुल, हिम्मतपुरमल्ला)

जीवन सर हमारे लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं, जहां लोग कुछ भी सीखाने के लिए पैसा लेते हैं। वहीं जोशी जी पैसा लेना तो दूर मुफ्त में सीखाने के साथ ही आने जाने का खर्चा भी देते हैं।

– ममता जोशी (भगवानपुर ब्लाक)

वहीं इनको सीखने वाले जीवन जोशी का कहना है कि कुछ कमियां तो हैं, लेकिन मेरा मुख्य उद्देश इन महिलाओं को स्वरोजगार की ओर ले जाने के साथ ही बगेट कला का विस्तार है। अभी जब तक ये सीख रही हैं तब तक मैं इनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की बिक्री के बाद उसमें हुए मुनाफे को इन्हें देने के प्रति वचनबद्ध हूं।

उनका कहना है कि अब तक किसी जनप्रतिनिधि या किसी अन्य से मदद नहीं मिलने के चलते अभी मजबूरी में इस गर्मी में भी इन महिलाओं को ऐसे स्थान पर सीखाने को मजबूर हूं।

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कालाढूंगी क्षेत्र में होने के कारण जब उनसे क्षेत्र में जल्द होने वाले चुनावों को लेकर भी चर्चा की गई तो उनका कहना था कि कालाढूंगी क्षेत्र में किसी भी नेता का मैं विरोधी तो नहीं हूं, लेकिन मेरा यह मानना है कि यदि गुंजन तिवारी (Pushpa Memorial Foundation, Haldwani) जैसे युवा लोग जनप्रतिनिधि के रूप में चुनकर आए तो यह क्षेत्र के लिए किसी वरदान से काम नहीं होगा।

उनके अनुसार गुंजन तिवारी एक विजनरी व्यक्ति हैं, जो कि क्षेत्र की समस्याओं को हल करने के साथ ही भविष्य की स्थितियों को देखते हुए सटीक फैसला देने में पूरी तरह सक्षम है।

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स्वरोजगार के लिए एक नया ग्रुप तैयार
जीवन जोशी का कहना है कि मैंने जानबुझकर कई महिलओं को एक साथ यह कला सीखाई ताकि ये मिलकर एक नया ग्रुप बना सके, जिसमें न केवल यह एक दूसरे की मदद कर सके बल्कि एक नया स्वरोजगार सीख कर उसे खड़ा करने के साथ ही कइ लोगों को रोजगार भी दे सकें।

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