बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल, कानून में बदलाव की कही बात
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में बड़ा कारोबार करते हैं, लेकिन उनके अनुसार कर भुगतान उस अनुपात में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों की आय और टैक्स भुगतान के बीच बड़ा अंतर है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारत में अपने कारोबार और गतिविधियों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कुछ मामलों में आपत्तिजनक और अवैध सामग्री को समय पर हटाने में प्लेटफॉर्म प्रभावी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों और अभियानों को डिजिटल माध्यम पर असामान्य रूप से अधिक पहुंच मिलती है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
भाजपा सांसद ने हाल के कुछ सामाजिक और राजनीतिक अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कम समय में कुछ संगठनों की व्यूअरशिप और डिजिटल पहुंच में तेज वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में संबंधित प्लेटफॉर्म को स्पष्ट करना चाहिए कि कंटेंट की पहुंच और प्रसार किन आधारों पर निर्धारित होता है। उनके अनुसार इस विषय में अधिक पारदर्शिता आवश्यक है।
निशिकांत दुबे ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन के उपयोग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके प्लेटफॉर्म पर कितने उपयोगकर्ता वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार की जानकारी से डिजिटल गतिविधियों की बेहतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अवसरों पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक व्यक्तियों से जुड़े कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाया गया, जिससे अभिव्यक्ति और निष्पक्षता को लेकर प्रश्न खड़े हुए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की सामग्री हटाई जाती है तो उसके लिए स्पष्ट और समान मानदंड होने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे।
अपने वक्तव्य में निशिकांत दुबे ने तेलंगाना सरकार द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करते हैं तो सरकारों को कानूनी विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत उपलब्ध ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई।
सेफ हार्बर वह कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा किए गए थर्ड पार्टी कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे निर्धारित नियमों और कानूनी निर्देशों का पालन करें। फिलहाल सांसद के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डिजिटल नियमन और सेफ हार्बर व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
