कालाढूंगी की जनता का मोहभंग – वर्तमान विधायक के 15 वर्षों की कमियों पर लोगों का फूट रहा गुस्सा
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जनता खुलकर कह रही है – अब और नहीं
कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर नेता बंसीधर भगत के पिछले 15 वर्षों में कार्यकाल को लेकर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में विकास की कमी ने लोगों को इस कदर नाराज कर दिया है कि अब वे किसी भी स्थिति में दोबारा उन्हें मत न देने की बात करते तक साफ तौर से देखे जा सकते है।
क्षेत्र के कई लोगों का यहां तक कहना है कि जो काम वे 60—70 की उम्र में नहीं कर सके वे अब इस उम्र में क्या करेंगे। अब तो उनकी उम्र भी इतनी हो गई है कि वे क्षेत्र में ही पूरी तरह से दौड़ भाग नहीं कर सकेंगे, ऐसे में उनके पुन: आने पर क्षेत्र का विकास गर्त में चला जाएगा। जबकि उनके पुत्र के संबंध में क्षेत्र के अनेक लोगों का कहना है कि जब उनके पिता ने ही कभी क्षेत्र के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया तो वे क्या देंगे।
ज्ञात हो कि कालाढूंगी को विधानसभा बने एक लंबा समय हो चुका है, लेकिन आज भी बुनियादी बड़ी जरूरतों के लिए यह क्षेत्र पूरी तरह हल्द्वानी शहर पर निर्भर है।
क्षेत्रवासियों की नाराजगी का ये है मुख्य कारण
सड़क और जलभराव की समस्या: क्षेत्र में जगह-जगह टूटी सड़कें, कई गाँव अब भी पक्की सड़क से वंचित हैं। एक ओर जहां अंदरूनी गांवों की सड़कें आज भी खस्ताहाल हैं, जिन्हें चुनावी साल में तो ठीक किया जाता है, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पातीं।
वहीं मुखानी, कुसुमखेड़ा और ऊंचापुल जैसे शहरी/अर्ध-शहरी इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और सड़कों की खस्ताहाली एक परमानेंट समस्या बनी रही है। बरसात के दिनों में ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के कारण जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जागरुक हुई जनता: अब चाहती है कालाढूंगी में ऐसा नेता
कालाढूंगी रोड पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके स्थायी समाधान (जैसे बाईपास या चौड़ीकरण के सही क्रियान्वयन) को लेकर कोई ठोस और त्वरित कदम नहीं दिखे।
स्वास्थ्य सेवाएँ: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और दवाइयों की भारी कमी, कई इलाकों में अस्पताल तक नहीं हैं।
कालाढूंगी और कोटाबाग में स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर कोई ऐसा बड़ा सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल या ट्रामा सेंटर नहीं बन पाया जहां गंभीर मरीजों को हल्द्वानी रेफर किए बिना इलाज मिल सके।
ऐसे में कालाढूंगी और कोटाबाग ब्लॉक के दूरदराज के इलाकों में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं (Emergency Health Services) की कमी आज भी एक बड़ा मुद्दा है।

उच्च शिक्षा (Higher Education): क्षेत्र में कोई बड़ा केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रोफेशनल कॉलेज या बड़ा तकनीकी संस्थान (ITI/Polytechnic के स्तर से ऊपर) स्थापित नहीं हो पाया। युवाओं को आज भी डिग्री और बेहतर नौकरियों की पढ़ाई के लिए हल्द्वानी या बाहर जाना पड़ता है।
रोज़गार और युवाओं की उम्मीदें: युवाओं के लिए रोजगार सृजन की योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित रहीं। युवाओं के लिए क्षेत्र में ही रोजगार के साधन या कोई बड़ा उद्योग स्थापित करवाने में नाकामी भी बड़ा मुद्दा है।
किसान और पानी की समस्या: सिंचाई व बाज़ार तक पहुँच दिलाने का वादा अधूरा रहने के साथ ही कई गाँवों में आज तक पीने का पानी तक नहीं पहुंच सका है।
यह पूरा क्षेत्र कृषि प्रधान है। नहरों की मरम्मत, सिंचाई के पानी की टेल (आखिरी छोर) तक उपलब्धता और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं न मिलने से किसान पिछले डेढ़ दशक से परेशान हैं।
जनता का गुस्सा और नाराज़गी
जनता का कहना है कि वर्षों से धरना-प्रदर्शन और आवाज़ उठाने के बावजूद जनप्रतिनिधि ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। महामारी के समय स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने नाराज़गी को और गहरा कर दिया।
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क्यों नहीं चाहती जनता उन्हें एक बार फिर विधायक?
2027 के चुनावों से पहले जनता साफ कह रही है कि वे बंसीधर भगत को अपने क्षेत्र से दोबारा विधायक बनाने को तैयार नहीं हैं। बुजुर्ग कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे जनसंघ के जमाने से पार्टी से जुड़े रहे हैं, लेकिन इस बार भगत या उनके परिवार/समर्थक को टिकट मिला तो वे खुलकर विरोध करेंगे।
अन्य नाराजगी…
कुल मिलाकर कालाढूंगी को विधानसभा बने एक लंबा समय हो चुका है, लेकिन आज भी बुनियादी बड़ी जरूरतों के लिए यह क्षेत्र पूरी तरह हल्द्वानी शहर पर निर्भर है।
इसके अलावा कालाढूंगी विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा कोटाबाग ब्लॉक और ग्रामीण भाबर क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पिछले 15 सालों में यहां के निवासियों में यह भावना मजबूत हुई है कि विकास का मुख्य फोकस शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों पर ज्यादा रहा।
ज्ञात हो कि कालाढूंगी विधानसभा एक बड़ा और भौगोलिक रूप से विविध क्षेत्र है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले सालों में कुछ बुनियादी मुद्दों पर अपेक्षित काम नहीं हो सका:
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ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक और कृषि संकट : कालाढूंगी का एक बड़ा हिस्सा कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटा हुआ है और ग्रामीण व कृषि प्रधान है। इस क्षेत्र में सुरक्षा की कमी पिछले 15 सालों की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक मानी जाती है। कालाढूंगी का एक बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा है:
: पिछले 15 वर्षों में गुलदार (तेंदुए), हाथियों और जंगली सूअरों के हमले में दर्जनों ग्रामीणों की जान गई है और करोड़ों की फसल बर्बाद हुई है।
: जनता की लगातार मांग के बावजूद, वन विभाग के साथ मिलकर सोलर फेंसिंग, दीवारों का निर्माण या कोई ठोस नीति लागू करने में विधायक स्तर पर कोई बड़ा विजन नहीं दिखा।
: कोटाबाग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों (जैसे गुलदार, हाथी और जंगली सूअर) द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने और इंसानों पर हमलों की घटनाएं पिछले सालों में बढ़ी हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप रहता है कि विधायक स्तर से वन विभाग पर दबाव बनाकर इसके लिए कोई ठोस फेंसिंग या सुरक्षा नीति लागू नहीं करवाई जा सकी।
: वहीं भाबर और कोटाबाग के कुछ अंदरूनी गांवों में कृषि के लिए सिंचाई के पानी की किल्लत की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं।
अधिकारियों पर पकड़ में कमी की शिकायत: कई बार स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता द्वारा यह शिकायत भी सामने आई कि वरिष्ठ नेता होने के बावजूद नौकरशाही (Bureaucracy) पर उनकी वह पकड़ नहीं दिखी, जिससे आम जनता के छोटे-मोटे काम बिना किसी बाधा के हो सकें।
इसके अलावा पिछले 15 सालों में मुखानी, कुसुमखेड़ा, आरटीओ रोड, ऊंचापुल और लामाचौड़ जैसे इलाकों में आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है, लेकिन विधायक के तौर पर वे इसके लिए कोई मास्टर प्लान तैयार नहीं करवा पाए:
जलभराव (Waterlogging): बिना ड्रेनेज सिस्टम के कॉलोनियां कटती गईं। नतीजा यह है कि पिछले 15 सालों से हर मानसून में इन पॉश इलाकों की सड़कें तालाब बन जाती हैं और लोगों के घरों में पानी घुस जाता है।
अतिक्रमण और ट्रैफिक: कालाढूंगी रोड पर ट्रैफिक का दबाव 10 गुना बढ़ गया है, लेकिन इसके चौड़ीकरण या वैकल्पिक मार्गों (Alternative Routes) के निर्माण में इतनी देरी हुई कि जनता को सालों तक जाम से जूझना पड़ा।
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लगातार बड़बोलापन और राजनीतिक विवाद
जानकारों के अनुसार एक वरिष्ठ नेता से उम्मीद की जाती है कि समय के साथ उनका राजनीतिक आचरण और गंभीर होगा, लेकिन पिछले 15 सालों में उनके बयानों का ग्राफ लगातार विवादों की ओर ही बढ़ा:
: कई बार सार्वजनिक मंचों पर या कार्यकर्ताओं के साथ उनके तीखे और अनौपचारिक लहजे की आलोचना हुई।
विवादित और अनियंत्रित बयानबाजी: बंशीधर भगत अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में और विवादों में रहे हैं, जिसे जनता और राजनीतिक विश्लेषक एक वरिष्ठ नेता के तौर पर उनकी सबसे बड़ी कमी मानते हैं:
: जब वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब अपनी ही सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों पर तल्ख टिप्पणियां करने को लेकर वे विवादों में आए, जिससे गुटबाजी को हवा मिली।
: ज्ञात हो कि साल 2021 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास महिलाओं को लेकर दिए गए एक बयान पर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्हें सफाई और माफी मांगनी पड़ी थी।
: कांग्रेस की दिवंगत नेता इंदिरा हृदयेश पर की गई एक व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद उनकी चौतरफा किरकिरी हुई थी, जिससे पार्टी की छवि पर भी असर पड़ा था।
वहीं रही सही कसर विधायक के उस बयान ने निकाल दी जिसमें उन्होंने ”मुझे नहीं तो मेरे पुत्र को टिकट मिले” से जुड़ी बात कही। उनकी इस बात ने तो क्षेत्र में आग की तरह उनके विरोध को भड़का दिया। जिसके बाद भाजपा के मुख्य गढ़ कालाढूंगी विधानसभा में भाजपा से जुड़े अनेक लोग तक उनका तीखे विरोध करने लगे। पार्टी की लाइन से ठीक विपरीत आए इस बयान को लेकर पार्टी के समर्थक तक उनके विरोध में आ गए।
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पूराने लोगों का भी हुआ मोहभंग
उनकी इस टिप्पणी के चलते क्षेत्र के वे बुजूर्ग जो जनसंघ के जमाने से पार्टी से जुड़े थे वे भी सीधे सामने आ गए। और बातचीत के दौरान खुले आम कहने लगे की बस अब बहुत हुआ यदि भाजपा 2027 में भी भगत या उसके किसी परिजन को ही टिकट देती है तो हम खुद भाजपा के विरोध में मतदान करेंगे। उनका यहां तक कहना था कि केवल हम ही नहीं हम अपने परिजनों से भी भाजपा को मतदान नहीं करने के लिए कहेंगे। चाहे वे अपना वोट नोटा मे ही क्यों न डालें पर भाजपा को नहीं। क्योंकि पार्टी की लाइन से अलग होने वाले इस बयान ने यह साफ दर्शा दिया है कि अब बंसीधर पार्टी के वफादार सिपाही नहीं रहे।
क्षेत्र के लोगों की ये है मंशा: वहीं जब उनसे यह पुछा गया कि भगत नहीं तो कौन? इस पर उनका कहना था कि कोई नया युवा जिसके विचार पार्टी से मिलते हों, जिसके लिए देश सबसे पहले हो, जो अंदरुनी राजनीति से अलग हो और उसका विजन शानदार होने के साथ ही वह क्षेत्र की सेवा के लिए हर स्तर पर तैयार हो।
People of Kaladhungi vidhansabha are angry, saying that if there are no development works and resolution of problems in the area, they will not vote either for him
