September 14, 2026

मानसून हुआ सुस्त, 22 जिलों में आज हल्की बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी से आने वाला सिस्टम बदलेगा मौसम का मिजाज

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मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर रुक गया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। फिलहाल करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके कारण प्रदेश में केवल हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर बना हुआ है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 16 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने के बाद एक बार फिर प्रदेश में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर समेत 22 जिलों में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई जिलों में दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार फिलहाल मानसून को सक्रिय रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्यप्रदेश से दूर चला गया है। इसी वजह से प्रदेश में लगातार रिमझिम बारिश तो हो रही है लेकिन कहीं भी जोरदार वर्षा देखने को नहीं मिल रही। अगले दो से तीन दिन तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है।

मौसम विभाग का कहना है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बनने के संकेत हैं। यदि यह सिस्टम निम्न दाब क्षेत्र में बदलता है तो इसका सीधा असर मध्यप्रदेश पर पड़ेगा और प्रदेश में फिर से व्यापक और तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में बन रहे नए मौसम तंत्रों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि इनमें से किसी एक के बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने पर मानसून को नई ताकत मिल सकती है।

बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने का असर प्रदेश के मौसमी आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ दिन पहले तक सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा रही थी, लेकिन अब यह बढ़त घटकर केवल एक प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 241.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिलीमीटर है। यानी फिलहाल बारिश सामान्य से केवल एक प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश में इस बार जून के मुकाबले जुलाई से ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि सामान्य तौर पर मानसून की लगभग 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में जुलाई सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि नया सिस्टम मजबूत हुआ तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बारिश की कमी तेजी से पूरी हो सकती है।

बारिश के आंकड़ों की बात करें तो देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, हरदा, सीहोर, उज्जैन और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश हुई है। दूसरी ओर अलीराजपुर, झाबुआ, धार और कुछ पूर्वी जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाला नया सिस्टम इन क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश लेकर आएगा।

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