September 22, 2026

जिस नक्शे पर निगम ने दी थी बिल्डिंग परमिशन उसी के खिलाफ अब कार्रवाई बावड़ियाकलां के 22 मकान अवैध घोषित

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भोपाल। भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित शुभालय बिहार में 22 मकानों को लेकर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित की जमीन पर टीएंडसीपी से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए गए इन निर्माणों को नगर निगम ने अवैध घोषित करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए हैं। निगम ने 17 मकान मालिकों को 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं जबकि पांच अधूरे मकानों का निर्माण तत्काल रोकने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद अब इन मकानों में रहने वाले और निर्माण करा रहे लोगों के सामने अपने निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

इस मामले की खास बात यह है कि जिन मकानों को अब नगर निगम अवैध निर्माण बता रहा है उनमें से बिल्डिंग परमिशन पहले नगर निगम की ही बिल्डिंग परमिशन शाखा की ओर से जारी की गई थी। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई और पहले जारी की गई अनुमतियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद आगे बढ़ा है। उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को पत्र भेजकर संबंधित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था।

इसके बाद नगर निगम ने पहले 17 मकानों को नोटिस जारी किए और अब बाकी पांच अधूरे मकानों को भी कार्रवाई के दायरे में ले लिया है। इस तरह शुभालय बिहार में कुल 22 निर्माणों को लेकर निगम ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। 17 मकानों के मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया है ताकि वे कथित अवैध हिस्से को स्वयं हटा सकें। वहीं जिन पांच मकानों का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है वहां आगे किसी भी तरह का निर्माण करने पर रोक लगा दी गई है।

मामले के याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के अनुसार यह विवाद केवल 22 मकानों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे जमीन और प्लॉट की बिक्री से जुड़ा बड़ा मामला है। उनका आरोप है कि संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब पांच एकड़ जमीन पर भू माफिया ने 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेच दिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक इन प्लॉटों को खरीदने वाले लोग संस्था के सदस्य नहीं थे और उन्होंने संस्था को राशि भी नहीं दी। दूसरी ओर संस्था के संस्थापक सदस्यों को उनकी जमीन का हिस्सा नहीं मिल पाया।

मामले में सहकारिता विभाग की जांच भी हुई है। विभाग की फरवरी 2026 की जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। जांच में इनमें से 32 रजिस्ट्रियों को अवैध बताया गया। इसके अलावा 38 रजिस्ट्रियों से संबंधित करीब 18 करोड़ 74 लाख रुपए की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं होने की बात भी सामने आई।

ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज और हैंडराइटिंग में हेरफेर के जरिए वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित किए जाने का उल्लेख किया गया है। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल से जुड़ी बताई गई हैं। सहकारिता विभाग ने इन रजिस्ट्रियों को शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट में मामला भी दायर किया है। अब नगर निगम की ताजा कार्रवाई के बाद बावड़ियाकलां के इन 22 मकानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

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