Ajab-Gajab Uttarakhand: BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के पैतृक गांव का बंदोबस्ती रिकॉर्ड गायब
-
तीन साल से भटक रहे ग्रामीण
राज्यसभा सांसद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के पैतृक गांव ब्राह्मण थाला का बंदोबस्ती रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखागार से गायब है। ग्रामीण भूमि संबंधी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन रिकॉर्ड नहीं होने से उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। इससे न तो लोगों के जाति प्रमाणपत्र बन पा रहे हैं और न ही सड़क निर्माण में गई जमीन का मुआवजा मिल पा रहा है। हालांकि अब डीएम ने जल्द रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं सांसद भट्ट ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं था, अब पता चला है।
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1936 में भूमि के सर्वेक्षण, सीमांकन और मालिकाना हक तय करने के लिए बंदोबस्त प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके तहत गांवों की भूमि के नक्शे, खसरा-खतौनी और भू-राजस्व का निर्धारण किया गया। वर्ष 1957 में दोबारा बंदोबस्त हुआ, जो वर्ष 1962 तक मान्य रहा। इसके बाद बंदोबस्त नहीं हुआ। पुराने बंदोबस्ती अभिलेख आज भी भूमि स्वामित्व से जुड़े राजस्व और कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
बंदोबस्ती नकल नहीं निकाल पा रहे ग्रामीण
ग्राम प्रधान डी थपलियाल ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र पंचायत की बैठकों में और पत्राचार के माध्यम से ब्राह्मण थाला का बंदोबस्ती रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन कुछ हुआ नहीं। उन्होंने बताया कि मोहनखाल-ताली सड़क निर्माण के दौरान थाला गांव के कई ग्रामीणों की भूमि सड़क में चली गई लेकिन जोरापाणी तोक की भूमि का मुआवजा अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण अटक गया है।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि भूमि उनके नाम दर्ज है लेकिन, बंदोबस्ती रिकॉर्ड नहीं मिलने से वे इसे साबित नहीं कर पा रहे हैं। जिससे मुआवजा नहीं मिल रहा है। हरीश थपलियाल ने बताया कि भूमि अभिलेख उपलब्ध न होने से परिवार में भूमि का बंटवारा भी लंबित है। कई ग्रामीण बच्चों के जाति प्रमाणपत्र के लिए भी बंदोबस्ती नकल नहीं निकाल पा रहे हैं।
गांव ब्राह्मण थाला है: राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का पैतृक
पोखरी ब्लॉक का ब्राह्मण थाला गांव राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का पैतृक गांव है। उनकी भी गांव में पुश्तैनी भूमि है। ग्रामीणों का कहना है कि रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से कई लोग अपने बच्चों के नाम भी भूमि अभिलेखों में दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
गांव का रिकॉर्ड गायब होने की होगी जांच
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार ब्राह्मण थाला गांव के बंदोबस्ती रिकॉर्ड को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पहले ये रिकॉर्ड पौड़ी मुख्यालय में रखे थे, जिन्हें अब जिला मुख्यालय लाया गया है। थाला गांव का रिकॉर्ड कहां गायब हो गया, उसकी जांच कराई जाएगी।
प्रदेश में और भी कई जगह है बड़े घपले
इतना ही नहीं प्रदेश में कई जगहों पर तो यह भी देखने में आया है कि यदि किसी घर में 4—6 भाई थे जिनमें से कुछ रोजगार की तलाश में बाहर चले गए तो वापस आने पर पाया कि उस पूरे मकान व जमीन के वहां पहाड़ों पर ही रूके कुछ भाईयों में से किसी एक के परिवार ने धोखे से अपने नाम करवा लिया है। जबकि उनकी ओर से इस पर कोई सहमति नहीं दी गई।
