धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण तुलना पर मचा विवाद, बोले हमारे राम सीधे तुम्हारे कृष्ण टेढ़े, सफाई में कहा प्रेम भाव में कही बात
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण की तस्वीरों में वे कई बार कमर और गर्दन को झुकाकर खड़े दिखाई देते हैं। उनके मुताबिक भगवान कृष्ण का नाम भी टेढ़ा है और उनका खड़ा होने का अंदाज भी अलग है। इसके विपरीत उन्होंने भगवान राम को सीधे खड़े होने वाला और सरल स्वरूप वाला बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूछा कि वहां रामजी को मानने वाले कितने लोग बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने राम और कृष्ण के भक्तों के बीच तुलना करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई।
धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बांसुरी का जिक्र करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है क्योंकि कलाकार भी बांसुरी बजा लेते हैं। उन्होंने कथा में मौजूद बांसुरी वादक की ओर इशारा करते हुए उससे धुन बजाने को कहा। इसके बाद कलाकार ने कुछ देर तक बांसुरी बजाई। शास्त्री ने कहा कि बांसुरी बजाना तो खेल है लेकिन धनुष चलाना आसान काम नहीं है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भगवान राम के धनुष धारण करने और उनके पराक्रम को भगवान कृष्ण की बांसुरी से जोड़कर तुलना की।
उन्होंने भगवान कृष्ण के गाय चराने और गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का भी उल्लेख किया। शास्त्री ने कहा कि गाय चराना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके बाद उन्होंने बंदरों को नचाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह भी आसान काम नहीं है। गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना पर उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे भगवान पर्वत उठा लेते हैं लेकिन इसमें क्या बड़ी बात है। हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। यहां उनका इशारा भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की ओर था जिन्होंने रामायण की कथा में संजीवनी बूटी लाने के लिए पर्वत का हिस्सा उठा लिया था।
हालांकि अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी बात का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे ठाकुर जी के विरोधी हैं। बाद में अपने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि कृष्ण जी टेढ़े हैं और रामजी सीधे हैं तो इसमें गलत क्या कहा। उन्होंने दावा किया कि यह बात उन्होंने प्रेम भाव में कही थी। उनके मुताबिक जिससे ज्यादा प्रेम होता है उससे इस तरह की बातें भी की जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम में भी कृष्ण शब्द जुड़ा हुआ है।
धीरेंद्र शास्त्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब धार्मिक कथावाचकों के बयानों पर पहले भी विवाद होते रहे हैं। इससे पहले जून 2024 में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधारानी के विवाह को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान पर ब्रज क्षेत्र में नाराजगी सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद प्रदीप मिश्रा बरसाना पहुंचे थे और राधारानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी थी।
अब धीरेंद्र शास्त्री की राम और कृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर उन्होंने इसे प्रेम और भक्ति की भावना से कही गई बात बताया है तो दूसरी ओर भगवान के दोनों स्वरूपों की तुलना को लेकर बहस शुरू हो गई है। फिलहाल उनके बयान और सफाई को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने का इंतजार है।
