रूस से तेल खरीद पर भारत को अमेरिकी टैरिफ में राहत, भारतीय निर्यातकों को मिलेगा फायदा, 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
टाइम्स कुवैत की रिपोर्ट के अनुसार रूस से ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर भारतीय निर्यातकों के सामने अतिरिक्त टैरिफ का खतरा बना हुआ था। कुछ परिस्थितियों में भारतीय निर्यात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका जताई गई थी। इस वजह से कई कंपनियों और अमेरिकी आयातकों के बीच कारोबार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। अब अमेरिकी प्रशासन के फैसले से इस तत्काल खतरे में कमी आने की उम्मीद है। इससे भारतीय कारोबारियों को अपने निर्यात और व्यापारिक योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस राहत का असर केवल मौजूदा व्यापारिक सौदों तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनियों को अब शिपमेंट की योजना बनाने और लंबे समय के अनुबंधों पर बातचीत करने में अधिक भरोसा मिल सकता है। साथ ही निवेश से जुड़े फैसले लेने में भी आसानी हो सकती है। इंजीनियरिंग उत्पादों और औद्योगिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों में कारोबार लंबे समय के खरीद संबंधों और समय पर माल की आपूर्ति पर निर्भर करता है। ऐसे में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता कम होना भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में विनिर्माण क्षेत्र के सामान फार्मास्यूटिकल्स इंजीनियरिंग उत्पाद इलेक्ट्रॉनिक्स और श्रम आधारित वस्तुएं शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कंपनियां अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी आयातक अब भारतीय कंपनियों से खरीद के विकल्पों पर पहले की तुलना में अधिक भरोसे के साथ विचार कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नीतिगत अनिश्चितताओं के बजाय नए व्यावसायिक अवसरों पर ध्यान देने में मदद मिल सकती है।
आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का अमेरिका को वस्तुओं का निर्यात करीब 86.5 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 87.3 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान टैरिफ से जुड़े दबावों के बावजूद निर्यात में करीब 0.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सितंबर 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़कर 8.02 अरब डॉलर पहुंच गया। सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 5.42 अरब डॉलर था। इस तरह सालाना आधार पर इसमें करीब 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टैरिफ छूट से व्यापार से जुड़ी सभी चुनौतियां खत्म नहीं होंगी। हालांकि इससे तनाव बढ़ने का जोखिम कम हो सकता है और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल तैयार हो सकता है। ऊर्जा विनिर्माण प्रौद्योगिकी निवेश और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच 2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए नीतिगत स्थिरता और कारोबारी भरोसे के साथ-साथ निर्यात क्षमता और आपसी सहयोग को भी मजबूत करना होगा। फिलहाल रूस से जुड़े ऊर्जा व्यापार पर अमेरिकी फैसले को भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
