देशभर में RSS का बढ़ता संगठनात्मक दायरा, 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन और 13 हजार नई शाखाएं, इंदौर की बैठक में तय होगी भविष्य की दिशा
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार बैठक में संघ के 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों से पदाधिकारी पहुंचे हैं। इनमें संघचालक सह संघचालक कार्यवाह सह कार्यवाह प्रचारक और सह प्रचारक शामिल हैं। बैठक के अंतिम दिन अलग-अलग विषयों पर विस्तृत जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। संघ की ओर से बताया गया है कि पिछले एक साल में देशभर में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं। इसके साथ ही शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों से मिले अनुभवों पर भी विचार किया जाएगा।
संघ के अनुसार देशभर में दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। वहीं साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संगठन की गतिविधियां अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच चुकी हैं। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में दैनिक शाखाओं में 13 हजार से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैठक में इस विस्तार के पीछे किए गए प्रयासों की समीक्षा होगी और यह तय किया जाएगा कि जिन क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियां कम हैं वहां किस तरह काम को आगे बढ़ाया जाए।
शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया। शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण इलाकों में आठ से दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडलों में ये सम्मेलन आयोजित किए गए। सुनील आंबेकर के मुताबिक इन आयोजनों में लोगों की भागीदारी उत्साहजनक रही और कई लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी स्वयंसेवकों के अनुभवों का अपने कार्यक्रमों में उपयोग करने की इच्छा जाहिर की है। बैठक में इन सम्मेलनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।
महिलाओं और युवाओं को संगठनात्मक तथा सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी को देखते हुए अब उनके लिए नए कार्यक्रम और उपक्रम तैयार करने पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए कॉलेज परिसरों और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा भी होगी। इसके साथ ही नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की योजना पर चर्चा होगी। संघ का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए परिवारों शैक्षणिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी जरूरी है।
बैठक में पंच परिवर्तन के पांच विषयों को लेकर भी आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इनमें सामाजिक समरसता पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली कुटुंब प्रबोधन स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान और सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। अब विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर इन विषयों पर नए अभियान चलाने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
इसके अलावा डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के विदेश प्रवास के अनुभवों पर भी चर्चा होगी। सुनील आंबेकर के अनुसार इन यात्राओं के दौरान भागवत ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद किया और हिंदुत्व की अवधारणा तथा भारत की वैश्विक दृष्टि पर विचार रखे। बैठक में जेन-जी आंदोलनों से जुड़े सवाल पर भी आंबेकर ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य देशहित में होना चाहिए। कुल मिलाकर इंदौर की यह बैठक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ संगठन के अगले चरण की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
