September 26, 2026

अमेरिका में वोटर लिस्ट की होगी नागरिकता जांच, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के SAVE सिस्टम को दी मंजूरी

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नई दिल्ली। अमेरिका में मतदाता सूची में नागरिकता सत्यापन को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के संशोधित SAVE सिस्टम के इस्तेमाल का रास्ता फिलहाल साफ कर दिया। इस आदेश के बाद राज्य मतदाता सूची में दर्ज लोगों की नागरिकता की पुष्टि के लिए Department of Homeland Security यानी DHS के SAVE सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि यह व्यवस्था राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश फिलहाल निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने तक सीमित है।

SAVE यानी Systematic Alien Verification for Entitlements सिस्टम का इस्तेमाल लंबे समय से नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़ी जानकारी की पुष्टि के लिए किया जाता रहा है। ट्रंप प्रशासन ने 2025 में इसके दायरे को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया था। इसके तहत सिस्टम में प्राकृतिक रूप से जन्मे अमेरिकी नागरिकों से जुड़े रिकॉर्ड और Social Security Administration की जानकारी को भी जोड़ने की व्यवस्था की गई। साथ ही राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को मतदाता पंजीकरण तथा मौजूदा वोटर लिस्ट में नागरिकता की पुष्टि के लिए इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देने की कोशिश की गई।

इस बदलाव को लेकर कानूनी विवाद भी शुरू हुआ। निचली अदालत ने संशोधित SAVE सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। अदालत में यह तर्क दिया गया था कि नई व्यवस्था से निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े होते हैं और गलत डेटा के कारण पात्र अमेरिकी नागरिकों को भी गैर नागरिक के तौर पर चिन्हित किए जाने का जोखिम हो सकता है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को आपातकालीन आदेश के जरिए निचली अदालत की रोक को फिलहाल स्थगित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने कहा कि संघीय सरकार के पास राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की नागरिकता सत्यापन संबंधी मांगों का जवाब देने का दायित्व है। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत का आदेश सरकार को उस कार्यक्रम के इस्तेमाल से रोक रहा है जिसे वह इस काम के लिए उपयुक्त मानती है। इस फैसले से राज्यों को आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की जांच के लिए SAVE सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है।

हालांकि फैसले के साथ कुछ महत्वपूर्ण सीमाएं भी जुड़ी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव के बेहद करीब मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने पर संघीय कानून की पाबंदियां लागू रहती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि ऐसी सीमाएं आगामी चुनाव पर व्यवस्था के तत्काल प्रभाव को सीमित करती हैं। राज्यों की ओर से व्यक्तिगत स्तर पर नागरिकता की जांच की जा सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर राज्य को बड़े पैमाने पर नाम हटाने की स्वतः अनुमति मिल गई है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों सोनिया सोतोमयोर एलेना कगन और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति जताई। विरोध करने वाले पक्ष ने SAVE में Social Security रिकॉर्ड जोड़ने और गलत पहचान की आशंका को लेकर सवाल उठाए हैं। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि संशोधित सिस्टम की जानकारी के आधार पर कुछ पात्र नागरिकों को गलत तरीके से गैर नागरिक के तौर पर चिन्हित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतिम रूप से पूरे विवाद का निपटारा नहीं करता बल्कि निचली अदालत की रोक को आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान स्थगित करता है। ऐसे में अमेरिका में मतदाता सूची की नागरिकता जांच और SAVE सिस्टम की वैधता को लेकर कानूनी बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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