8वें वेतन आयोग में 72 हजार रुपये तक पहुंच सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी, कर्मचारी यूनियनों ने रखी बड़ी मांग..
नई दिल्ली ।केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हैं। इस आयोग के फैसलों से आने वाले वर्षों में सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन, भत्तों और पेंशन में बदलाव का रास्ता तय होगा। खासतौर पर फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने अपनी मांगें रखी हैं। अलग-अलग संगठनों ने इसे 3.61 से 4.00 के बीच रखने का प्रस्ताव दिया है। यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो मौजूदा 18,000 रुपये का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 65,000 से 72,000 रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह अभी संगठनों के प्रस्ताव हैं, अंतिम निर्णय आयोग और केंद्र सरकार को लेना है।
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय 8वें वेतन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में 12 महीने से अधिक समय बीत चुका है। आयोग को वेतन संशोधन के साथ भत्तों और पेंशन में सुधार पर भी विचार करना है। इन सभी विषयों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी के आधार पर पुराने वेतनमान के मूल वेतन को नए वेतनमान में बदला जाता है। आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन की नई गणना इसी व्यवस्था के अनुसार होगी।
फिटमेंट फैक्टर को समझने के लिए इसका सीधा गणित जानना जरूरी है। नए वेतन आयोग में मूल वेतन निकालने के लिए वर्तमान बेसिक पे को निर्धारित फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है। सातवें वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। उस समय छठे वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये था। इसे 2.57 से गुणा करने पर 17,990 रुपये की राशि आई, जिसे राउंड ऑफ करके 18,000 रुपये कर दिया गया। अब आठवें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन इससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने सबसे अधिक 4.00 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। संगठन के अनुसार, इसे मंजूरी मिलने पर न्यूनतम बेसिक सैलरी 72,000 रुपये हो सकती है। BPMS ने अपनी मांग के समर्थन में प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय में वृद्धि, मौजूदा महंगाई भत्ते और पांच सदस्यों वाले परिवार की बुनियादी जरूरतों को आधार बनाया है। संगठन का तर्क है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कर्मचारियों के लिए इतनी बढ़ोतरी जरूरी है।
NC-JCM Staff Side और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके आधार पर न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये प्रस्तावित किया गया है। NC-JCM ने पांच सदस्यों वाले परिवार के भोजन, कपड़े, मकान, शिक्षा और ईंधन पर होने वाले खर्च का आकलन किया है। वहीं, BPS ने 5.2 वेटेज वाली फैमिली यूनिट के आधार पर अपनी गणना तैयार की है।
मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। इसके लागू होने पर न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 65,000 रुपये हो सकती है। संगठन ने अपनी गणना के लिए 15वें इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के मानदंडों और रेप्टाकोस ब्रेट फैसले को आधार बनाया है। इसमें पांच सदस्यों वाले परिवार की जरूरतों और खर्चों को ध्यान में रखा गया है।
रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने कोई निश्चित फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित नहीं किया है। हालांकि, संगठन का कहना है कि वेतन संशोधन का उद्देश्य कर्मचारियों की वास्तविक आय में सुधार करना होना चाहिए। केवल महंगाई भत्ते की भरपाई को वेतन बढ़ोतरी का पर्याप्त आधार नहीं माना जाना चाहिए।
प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन में 7,000 रुपये तक का अंतर दिखाई देता है। जहां 3.61 के गुणांक पर करीब 65,000 रुपये वेतन प्रस्तावित है, वहीं 3.833 पर 69,000 रुपये और 4.00 पर 72,000 रुपये की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त NC-JCM ने पे-मैट्रिक्स के शुरुआती वेतन में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत लेवल-1 के लिए 69,000 रुपये, लेवल-6 के लिए 1,35,700 रुपये और मर्ज किए गए लेवल-9 तथा 10 के लिए 2,15,100 रुपये शुरुआती वेतन रखने की मांग की गई है।
आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों की समीक्षा कर अंतिम फैसला लेगी। फिलहाल किसी भी फिटमेंट फैक्टर या प्रस्तावित वेतन को मंजूरी नहीं मिली है। सरकार जिस गुणांक को स्वीकार करेगी, उसका असर अगले करीब एक दशक तक केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर पड़ सकता है।
