September 6, 2026

सूडान में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप, गोपनीय दस्तावेजों में सेना पर क्लोरीन गैस हमलों की गंभीर जानकारी सामने आई

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नई दिल्ली । तपते रेगिस्तान में चोरी-छिपे बम परीक्षण, हथियारों की सीक्रेट फैक्टरी के फर्श पर दम घुटने से मरे पड़े बिच्छू और कीड़े-मकोड़े, और जंग के बीच राजधानी खारतूम के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन के बड़े-बड़े सिलिंडरों की चोरी…गोपनीय डोजियर से सामने आई ऐसी कुछ जानकारियां सूडान सरकार के इन दावों को नकारने के लिए काफी है कि उसने गृह युद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया।

खुफिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा

सूडान में पिछले तीन साल से जारी खूनी गृहयुद्ध के बीच एक पश्चिम एशियाई खुफिया एजेंसी की ओर से जुटाए गए 150 से अधिक दस्तावेजों, वीडियो, तस्वीरों और हजारों इंटरसेप्टेड फोन कॉल्स से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इससे पता चलता है कि सूडानी सेना ने अपने खिलाफ मोर्चा खोलने वाली रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) को पस्त करने के लिए 2024 में बड़े पैमाने पर क्लोरीन गैस आधारित रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। इस केमिकल प्रोजेक्ट की कमान ब्रिगेडियर जनरल तारिक हुसैन के हाथों में थी।

पारंपरिक वॉरहेड के साथ क्लोरीन का उपयोग

लीक ब्लूप्रिंट के अनुसार, पारंपरिक वॉरहेड के साथ 33 पाउंड क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया गया। योजना यह थी कि धमाके के छर्रों से दुश्मन घायल हो और बची-खुची जान जहरीली गैस ले लेगी। साथ ही धमाके के चलते मौके पर केमिकल के सबूत भी नष्ट हो जाएंगे।

राहत एजेंसियों की मदद का किया दुरुपयोग

राजधानी खारतूम पर जब आरएसएफ का कब्जा होने लगा, तो जुलाई 2024 में जनरल तारिक ने सेना को क्लोरीन बम बनाने का सुझाव दिया। सेना ने ओमडुरमैन स्थित अल-मनारा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से बड़े पीले सिलिंडर जब्त किए। विडंबना यह है कि युद्धग्रस्त इलाकों में हैजा महामारी को रोकने और पानी साफ करने के लिए ये सिलिंडर अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों ने दान में दिए थे। अगस्त 2024 में जनरल हुसैन के भेजे एक संदेश से पता चलता है कि मिस्र से 20 क्लोरीन सिलिंडर मंगवाए गए थे, जो 1,100 रासायनिक बम बनाने के लिए पर्याप्त थे।

सेना प्रमुख ने दिए सबूत मिटाने के निर्देश

अमेरिकी प्रशासन ने कुछ सबूतों के आधार पर जनवरी 2025 से सूडानी सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान पर कड़े प्रतिबंध लगाने शुरू किए थे। अब सामने आए डोजियर से साफ हुआ है कि जनरल बुरहान को इस पूरे प्रोजेक्ट की सीधी जानकारी थी और उन्होंने अमेरिकी खुलासे के बाद इसके सभी सबूत मिटाने के निर्देश दिए थे।

दुश्मनों ने पी ली जहरीली गैस…सच कैसे सामने आया?

अक्तूबर 2024 तक मेरोवे एयरपोर्ट के बेस पर करीब 300 केमिकल बम तैयार करके रख दिए गए थे। 22 जुलाई 2024 को मेरोवे एयरपोर्ट से एंटोनोव विमान ने उड़ान भरी और रेगिस्तान में पहला सफल टेस्ट किया। लीक डोजियर से पता चलता है कि उसी समय जनरल हुसैन ने मैसेज भेजा था, परीक्षण 100% सफल रहा, बम निशाने पर गिरा और गैस फैल गई। सितंबर 2024 को अल-जैली तेल रिफाइनरी पर रासायनिक हमला किया गया। हुसैन के इंटरसेप्ट किए गए संदेश में लिखा था, उन्होंने गैस पी ली है। उस समय सोशल मीडिया पर विद्रोहियों को ऑक्सीजन मास्क पहने देखा गया था।

सबूत मिटाने का खेल

मई 2025 में जब अमेरिका ने रासायनिक हथियारों के संदेह पर सूडान पर प्रतिबंध लगाए, तो सेना प्रमुख जनरल बुरहान ने तुरंत जनरल हुसैन को मैसेज भेजकर सबूत मिटाने का फरमान सुनाया। जवाब मिला. ऑपरेशन एक महीने पहले ही पूरा कर दिया गया है। बाद में दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए बुरहान ने आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी गठित की। इसका मुख्य सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल तारिक हुसैन को ही बना दिया गया।

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