September 26, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अविनाश 85 बार रकम चोरी करते दिखा, 700 खाते खंगाले, चंपत राय के नाम एक भी नहीं

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अयोध्या।
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में दाखिल पुलिस चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करने और चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते कैमरे में दिखाई दिया। जांच में करीब 700 बैंक खातों को खंगाला गया, लेकिन चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला।

अविनाश 85 बार, करुणेश 2 बार रकम हटाते दिखा
चार्जशीट के अनुसार, मंदिर परिसर के गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम चोरी की कुल 105 घटनाएं सीसीटीवी फुटेज में सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा 85 घटनाओं में अविनाश शुक्ला उर्फ शनि की भूमिका दर्ज होने का दावा किया गया है। वह चार अन्य मौकों पर सह-अभियुक्तों की मदद करते भी दिखाई दिया।

पुलिस के मुताबिक, करुणेश पांडेय दो बार रकम चोरी करते और 68 बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखाई दिया। मनीष कुमार यादव 16 बार चढ़ावे की रकम अपने पास रखते और 19 बार अन्य आरोपियों का सहयोग करते कैमरे में दर्ज हुआ।

इसी तरह रमाशंकर मिश्र एक बार रकम हटाकर अपने पास रखते दिखाई दिए। लवकुश मिश्रा एक बार चोरी करते और 52 बार अन्य आरोपियों की मदद करते नजर आए। वहीं अनुकल्प मिश्र 56 बार अन्य सह-अभियुक्तों को चढ़ावे की रकम चोरी में सहयोग करते दिखाई दिए।

पुलिस की चार्जशीट में इन घटनाओं को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दर्ज किया गया है। ये फिलहाल अभियोजन के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

CDR में लगातार संपर्क, चैट में कैश के बंडलों का जिक्र
जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को भी अहम साक्ष्य माना गया है। पुलिस का दावा है कि संबंधित अवधि में आरोपियों के बीच लगातार संपर्क था। सीसीटीवी, डिजिटल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को मिलाकर चार्जशीट में आपसी समन्वय और कथित आपराधिक षड्यंत्र की बात कही गई है।

पुलिस के मुताबिक, अनुकल्प मिश्र के मोबाइल फोन से अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और लवकुश मिश्र के साथ चढ़ावे की रकम को लेकर किए गए टेक्स्ट संदेश मिले। इनमें कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, अदला-बदली करने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।

चार्जशीट में 25 से 30 जुलाई 2026 के सीसीटीवी फुटेज का भी जिक्र है। इसमें सुभाष श्रीवास्तव की मौजूदगी में गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान अविनाश शुक्ला उर्फ शनि को रकम हटाकर अपने पास रखते हुए दिखने का दावा किया गया है।

700 बैंक खातों की जांच, चंपत राय के नाम खाता नहीं
चढ़ावा चोरी की जांच के दौरान पुलिस ने करीब 700 बैंक खातों का लेनदेन खंगाला। इनमें ट्रस्टियों, आरोपियों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खाते शामिल थे। ट्रस्ट के बैंक खातों को भी जांच के दायरे में रखा गया।

जांच का मकसद यह पता लगाना था कि संदिग्ध रकम किन खातों में गई और उसका आरोपियों या अन्य संबंधित लोगों से कोई संभावित संबंध था या नहीं। पुलिस ने संदिग्धों के खातों में रकम की आवाजाही की भी पड़ताल की।

चार्जशीट में डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बैंक खातों के लेनदेन की तुलना अन्य आरोपियों और संदिग्धों के खातों से किए जाने का भी उल्लेख है। वहीं, विवेचना से जुड़े तथ्य के तौर पर दर्ज किया गया है कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला।

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव आरोपी नहीं, गवाह
चार्जशीट का एक अहम पहलू यह भी है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख है। इसी बिंदु को लेकर अदालत में अधिवक्ता संघ ने पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए हैं।

अधिवक्ता संघ ने जांच पर उठाए सवाल
चार्जशीट दाखिल होने के बाद बुधवार को विशेष अदालत में अधिवक्ता संघ की ओर से विवेचना पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। संघ का कहना है कि साक्ष्य के तौर पर 10 अधिवक्ताओं के शपथपत्र दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर कार्रवाई नहीं की।

अधिवक्ता संघ ने यह भी सवाल उठाया कि एसआईटी के गठन से पहले आरोपियों से बरामद रुपये जिस व्यक्ति के पास रखे गए थे, उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई।

संघ की ओर से दावा किया गया कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी बनाने के बजाय गवाह बनाया गया, जबकि ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को भी आरोपी नहीं बनाया गया। संघ का कहना है कि इनके खिलाफ प्रार्थनापत्र के जरिए साक्ष्य दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर संज्ञान नहीं लिया।

अधिवक्ता संघ ने इन लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल करने की मांग की है। इसके अलावा बरामदगी के समय और घटनास्थल के नक्शे को लेकर भी चार्जशीट पर सवाल उठाए गए हैं।

अदालत में आगे होगी आरोपों और साक्ष्यों की पड़ताल
पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा, CDR, बैंकिंग लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका बताई गई है। वहीं, चार्जशीट में शामिल आरोपों और अधिवक्ता संघ की आपत्तियों पर अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर करना है।

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