Swift टेलिस्कोप को बचाने निकला Link अंतरिक्षयान हुआ नष्ट, 250 करोड़ रुपये का मिशन तकनीकी दिक्कतों से हुआ विफल
नई दिल्ली । अंतरिक्ष में 22 वर्षों से काम कर रहे Swift Observatory को बचाने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। इसे ऊंची और अधिक स्थिर कक्षा में पहुंचाने के लिए भेजा गया Link अंतरिक्षयान अपना मुख्य मिशन पूरा नहीं कर सका और शुक्रवार को धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद नष्ट हो गया। इस मिशन पर करीब 3 करोड़ डॉलर यानी लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। अब Swift की कक्षा लगातार नीचे आ रही है और उसके नवंबर की शुरुआत में वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है।
Swift Observatory को वर्ष 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसे ब्रह्मांड में होने वाली बेहद तेज और शक्तिशाली घटनाओं का पता लगाने के लिए तैयार किया गया था। यह गामा-रे विस्फोट, तारों के विस्फोट और अचानक होने वाली अन्य अंतरिक्षीय घटनाओं का तेजी से पता लगाकर अपनी दिशा बदल सकता है। इसकी यही क्षमता इसे खगोलीय घटनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण बनाती रही है।
हाल के महीनों में सूर्य से निकलने वाली शक्तिशाली गतिविधियों के कारण Swift की कक्षा अनुमान से अधिक तेजी से नीचे आने लगी थी। इससे उसके धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने का खतरा बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए उसकी वैज्ञानिक गतिविधियां रोककर कक्षा को कुछ समय तक स्थिर रखने की कोशिश की गई थी, ताकि बचाव अभियान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
Swift को बचाने के लिए Link को 3 जुलाई को अंतरिक्ष में भेजा गया था। योजना के अनुसार Link को Swift के पास पहुंचकर अपनी तीन रोबोटिक भुजाओं की मदद से उसे पकड़ना था। इसके बाद दोनों अंतरिक्षयानों की स्थिति को नियंत्रित करते हुए Swift को ज्यादा ऊंची कक्षा में पहुंचाने का प्रयास किया जाना था। Link को तैयार करने में एक साल से भी कम समय लगा था।
हालांकि, प्रक्षेपण के तुरंत बाद Link में तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। Swift को सही दिशा में नियंत्रित करने के लिए जरूरी तीन रिएक्शन व्हील में से दो खराब हो गए। इसके बाद एक वाल्व में आई खराबी के कारण अंतरिक्षयान तेजी से घूमने लगा। इस स्थिति ने नियंत्रण और संचार दोनों को प्रभावित किया। इंजीनियरों ने बाद में Link पर नियंत्रण हासिल कर लिया, लेकिन तब तक काफी ईंधन खर्च हो चुका था।
ईंधन की कमी के कारण Link के पास Swift को पकड़कर उसकी कक्षा बदलने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं बची। इसी वजह से अगस्त में Swift को बचाने की कोशिश को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया। इसके बाद Link के बचे हुए समय का इस्तेमाल तकनीकी परीक्षणों और भविष्य के बचाव अभियानों के लिए जरूरी अभ्यास में किया गया।
मिशन की असफलता के बावजूद Link Swift के करीब पहुंचने में सफल रहा। दोनों अंतरिक्षयानों के बीच दूरी घटकर लगभग 12 से 15 किलोमीटर तक रह गई थी। इस दौरान Link ने Swift की तस्वीरें भी लीं। उसकी तीनों रोबोटिक भुजाओं का संचालन भी किया गया। प्रत्येक भुजा करीब तीन फीट लंबी थी और उसके सिरे पर पकड़ बनाने के लिए ग्रिपर लगा था।
अब Swift की कक्षा लगातार नीचे जा रही है और उसके पास अंतरिक्ष में काम करने के लिए सीमित समय बचा है। माना जा रहा है कि नवंबर की शुरुआत में वह धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इसके बाद अंतरिक्ष में अचानक होने वाली शक्तिशाली घटनाओं की निगरानी की उसकी लंबे समय से चली आ रही भूमिका समाप्त हो जाएगी। हालांकि Link अपने मुख्य लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका, लेकिन इस अभियान से भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को पकड़ने, उनकी स्थिति बदलने और उन्हें बचाने से जुड़ी तकनीक के लिए महत्वपूर्ण अनुभव मिला है।
