October 16, 2026

मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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