दिल के मरीज पहाड़ में भगवान भरोसे! अल्मोड़ा में तक कार्डियोलॉजिस्ट नहीं
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मरीजों को उपचार के लिए किया जा रहा है रेफर
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मशहुर अल्मोड़ा जिले में मेडिकल कॉलेज समेत कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थान होने के बावजूद हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी बनी हुई है। जिले में एक भी कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने से हृदय रोगियों को उपचार के लिए हल्द्वानी या अन्य बड़े अस्पतालों की ओर रेफर किया जा रहा है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले गंभीर मरीजों के लिए समय पर उपचार मिलना चुनौती बना हुआ है।
सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में हृदय संबंधी शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों को फिजिशियन प्राथमिक उपचार और जरूरी जांच के बाद हायर सेंटर रेफर करते हैं। हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती समय को उपचार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के कारण रेफरल की प्रक्रिया मरीजों के लिए जोखिम बना रहता है।
अल्मोड़ा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से हल्द्वानी की दूरी करीब 100 से 200 किलोमीटर है। पहाड़ी और संकरे मार्गों के कारण एंबुलेंस को कई बार लंबा सफर तय करना पड़ता है, जाम और खराब सड़क परिस्थितियों के कारण गंभीर मरीजों को हायर सेंटर तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। इस दौरान मरीजों को लगातार चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक मेडिकल सपोर्ट की जरूरत होती है।
रास्ते में तोड़ देते हैं कई लोग दम
पहाड़ी और संकरे रास्तों पर लगने वाले लंबे जाम के कारण एंबुलेंस अक्सर फंसी रह जाती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन और मेडिकल सपोर्ट नहीं मिल पाता। कई मामलों में तो समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
वहीं, स्थानीय लोगों अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञ की सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं। ताकि, मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा और दूरस्थ क्षेत्रों से होने वाले रेफरल का दबाव भी कम होगा, लेकिन पहाड़ों के अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था न होने से मरीज भगवान भरोसे हैं।
सीएमओ अल्मोड़ा डॉ. एचसी पंत के अनुसार जिले के अस्पतालों में वर्तमान में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) की तैनाती नहीं है। यह पद सुपर स्पेशलिस्ट श्रेणी में आता है। ऐसे में अस्पतालों में तैनात फिजिशियन हृदय रोगियों की जांच कर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते हैं। गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है।
