इंदौर में संघ का बड़ा आयोजन, ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ में राष्ट्र प्रथम और सामाजिक समरसता का संदेश, 2 नवंबर से अखिल भारतीय बैठक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इंदौर में होने वाला चरैवेति-एकत्रीकरण इसी श्रृंखला का प्रमुख समापन कार्यक्रम है। इसमें इंदौर महानगर और महू ग्रामीण क्षेत्र के सक्रिय स्वयंसेवकों के साथ समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों की सहभागिता भी रहेगी। बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आयोजन की तैयारियां पिछले एक महीने से की जा रही थीं। स्वयंसेवक कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे।
चरैवेति शब्द का भाव लगातार आगे बढ़ते रहने और अपने उद्देश्य के प्रति सक्रिय रहने से जुड़ा है। इसी विचार को केंद्र में रखकर कार्यक्रम में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और समाज को संगठित बनाने का संदेश दिया जाएगा। सामाजिक समरसता को मजबूत करने और नागरिकों में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। संघ की ओर से यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कार्यों की गतिविधियां निरंतर जारी रहनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और व्यक्तिगत स्तर पर देशहित में योगदान देने के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
कार्यक्रम में स्वयंसेवक शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ योग की प्रस्तुतियां भी होंगी। आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण चरैवेति-चरैवेति सामूहिक गीत रहेगा। इसके माध्यम से निरंतर आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का भाव व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान इंदौर विभाग में शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों और विभिन्न आयोजनों की जानकारी भी साझा की जाएगी।
आयोजन में बौद्धिक उद्बोधन के जरिए संघ के विचारों और सामाजिक दायित्वों पर चर्चा होगी। साथ ही राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को लेकर विचार रखे जाएंगे। इस कार्यक्रम को शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यों की समीक्षा और आगे की गतिविधियों के लिए नई ऊर्जा जुटाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की भागीदारी के कारण यह इंदौर में संघ के प्रमुख आयोजनों में शामिल है।
चरैवेति-एकत्रीकरण के बाद इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक भी आयोजित की जाएगी। यह बैठक 2 नवंबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। इस दौरान संगठनात्मक कार्यों और आगामी गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
इसी बीच मालवा प्रांत के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी भी चर्चा में है। प्रस्तावित योजना के तहत मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित करने पर विचार किया जा रहा है। नई व्यवस्था 2027 से लागू किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य संगठनात्मक कामकाज को छोटे और अधिक प्रभावी क्षेत्रों में बांटना है ताकि स्थानीय स्तर पर संपर्क गतिविधियों और योजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिल सके। हालांकि प्रस्तावित बदलाव की अंतिम रूपरेखा और लागू होने की प्रक्रिया को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।
कुल मिलाकर इंदौर का यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के समापन के साथ भविष्य के सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों के लिए दिशा तय करने का अवसर माना जा रहा है।
