सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल
18 वर्षीय अनाहत सिंह के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि जूनियर वर्ग में यह उनका आखिरी वर्ष था। पिछले चार वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में लगातार क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब से दूर रह जाती थीं। कई बार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने मजाक में इस टूर्नामेंट को अपने लिए श्राप तक बता दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सारी बाधाएं तोड़ दीं।
खिताब जीतने के बाद अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्हें पता था कि जूनियर करियर में यह उनका आखिरी मौका है इसलिए उन्होंने खुद पर किसी तरह का दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलना और फाइनल के हर पल का आनंद लेना था। यही सोच उन्हें विश्व चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मौके पर अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।
स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अनाहत में विश्व स्तर पर लंबे समय तक देश का नाम रोशन करने की क्षमता है। उनके अनुसार भारतीय स्क्वैश के लिए व्यक्तिगत वर्ग में विश्व चैंपियन तैयार करने का सपना अब आखिरकार पूरा हो गया है।
अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से पहले यह उपलब्धि देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए अनाहत का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार असफलताओं के बावजूद अगर हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपने जरूर सच होते हैं।
