MP में पटवारियों को मिलेगा प्रमोशन का मौका 1050 नामों की सूची जारी जून 2007 तक नियुक्त कर्मचारियों पर नजर
जानकारी के मुताबिक यह पदोन्नति प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित कार्यपालिक एवं तकनीकी सेवा भर्ती नियम 2012 में किए गए संशोधन के प्रावधानों को भी आधार बनाया जा रहा है। विभाग ने पात्र पटवारियों की जानकारी जुटाने के लिए जिलों को निर्देश जारी किए हैं।
इस प्रक्रिया में उम्र और नियुक्ति की तारीख को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। विभाग की ओर से 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 50 साल से कम उम्र वाले पटवारियों की सूची तैयार की गई है। इसके साथ ही ऐसे पटवारियों को भी सूची में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं जिनकी पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले हुई है।
राजस्व विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि यदि किसी ऐसे पटवारी का नाम मौजूदा सूची में नहीं है जो निर्धारित उम्र और नियुक्ति संबंधी शर्तों को पूरा करता है तो उसका नाम भी शामिल किया जाए। इसके लिए सेवा से संबंधित रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। यह जानकारी संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार के माध्यम से तैयार कराई जाएगी।
विभाग ने जानकारी जमा करने के लिए 30 सितंबर 2026 की समय सीमा तय की है। निर्देश के मुताबिक संबंधित जानकारी 30 सितंबर को सुबह 10 बजे तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
पटवारियों के प्रमोशन की यह प्रक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के काम को लेकर पटवारियों की ओर से आपत्तियां भी जताई गई हैं। योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता की भूमिका दिए जाने पर कर्मचारी संगठन और पटवारियों ने भविष्य की कानूनी जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं।
पटवारियों का कहना है कि जमीन का स्वामित्व लाभार्थी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है। ऐसे में पटवारी को रजिस्ट्री का निष्पादक बनाए जाने से भविष्य में विवाद की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का सवाल खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शे और खसरे के आधार पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती।
पटवारियों के अनुसार वास्तविक कब्जा वारिस सह स्वामित्व चतुर्सीमा पुराने दावे और न्यायालय में लंबित विवाद जैसे कई पहलू भी सामने आ सकते हैं। भविष्य में यदि किसी व्यक्ति की ओर से स्वामित्व को चुनौती दी जाती है तो रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल पटवारी भी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा बन सकता है। इसी वजह से इस जिम्मेदारी को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।
अब विभाग की ओर से 1050 पटवारियों के सेवा रिकॉर्ड जुटाए जाने के बाद प्रमोशन प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई होगी। जिलों से जानकारी मिलने के बाद पात्रता और सेवा संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
