September 23, 2026

महाकाल की सवारी के हाथी श्यामू पर विवाद गहराया, ब्लड टेस्ट रोका गया: मालिक ने जांच टीम का किया विरोध, डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता

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मध्‍य प्रदेश । उज्जैन में भगवान महाकाल की भव्य सवारी में वर्षों से शामिल रहे हाथी श्यामू को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को पन्ना टाइगर रिजर्व, इंदौर और उज्जैन की संयुक्त पशु चिकित्सकीय टीम हाथी के स्वास्थ्य परीक्षण और ब्लड सैंपल लेने के लिए पहुंची थी, लेकिन हाथी के मालिक और परिजनों के विरोध के चलते जांच पूरी नहीं हो सकी। इस दौरान काफी देर तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद टीम को बिना ब्लड सैंपल लिए ही वापस लौटना पड़ा और केवल मल एवं मूत्र के नमूने एकत्र किए गए।

जानकारी के अनुसार, यह टीम इंदौर चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव, उज्जैन के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन और पन्ना टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता के नेतृत्व में साईनाथ कॉलोनी स्थित हाथी श्यामू के स्थान पर पहुंची थी। टीम का उद्देश्य हाथी की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण करना था, लेकिन जैसे ही ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की गई, हाथी के मालिक सरमन गिरी और उनके परिवार ने इसका विरोध कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि लंबे समय तक बहस और असहमति की स्थिति बनी रही, जिसके चलते टीम को बिना रक्त नमूना लिए लौटना पड़ा।

पशु चिकित्सकों के अनुसार हाथी श्यामू की हालत सामान्य नहीं है। डॉक्टरों ने बताया कि हाथी के पैरों में गंभीर समस्या देखी गई है और उसके पैर धीरे-धीरे मुड़ने लगे हैं, जिससे उसकी चलने की क्षमता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में हाथी कभी भी गिर सकता है, जो उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सही स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी है, लेकिन मालिक के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका।

वहीं दूसरी ओर हाथी के मालिक सरमन गिरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि श्यामू पूरी तरह स्वस्थ है और वर्षों से महाकाल की सवारी में नियमित रूप से शामिल होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हाथी वास्तव में बीमार होता तो वह 2016 से लगातार सवारी का हिस्सा नहीं बन पाता। सरमन गिरी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग हाथी को यहां से हटाकर वनतारा या किसी अन्य संस्थान में भेजना चाहते हैं, इसलिए उसे जानबूझकर बीमार बताया जा रहा है।

मालिक ने यह भी दावा किया कि हाथी के सभी वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं और वह 2006 से उसके स्वामी हैं। उन्होंने जांच टीम पर अनावश्यक दबाव बनाने का आरोप लगाया और ब्लड सैंपल लेने का विरोध किया। इसी बीच मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना रहा और जांच प्रक्रिया अधूरी रह गई।

गौरतलब है कि हाथी श्यामू के स्वास्थ्य को लेकर सितंबर 2025 से विवाद लगातार जारी है। इससे पहले भी वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम कई बार उसकी जांच और स्थानांतरण के प्रयास कर चुकी है, लेकिन हर बार मालिक के विरोध के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

फिलहाल, अब सभी की नजर मल और मूत्र के सैंपल की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाथी श्यामू वास्तव में किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या नहीं। यह मामला अब धार्मिक आस्था और पशु स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच बहस का बड़ा विषय बन गया है।

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