October 13, 2026

एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

0
23-1791888977
मध्य प्रदेश। में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2026 को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। आवेदन की समयसीमा तीन बार बढ़ाए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने परीक्षा के लिए पंजीयन नहीं कराया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, परीक्षा के लिए करीब 30 हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है, जबकि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षक इसके दायरे में आते हैं। इस तरह करीब 1.20 लाख शिक्षकों ने निर्धारित समय तक फॉर्म नहीं भरा। आवेदन की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर थी।

आवेदन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने के लिए तीन बार समयसीमा बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद पंजीयन की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी। कुल डेढ़ लाख शिक्षकों की तुलना में लगभग 30 हजार पंजीयन का आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अभी भी परीक्षा से दूर हैं। इस स्थिति के पीछे शिक्षकों का विरोध प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। शिक्षक संगठन लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक पहले से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में आंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए आयोग बनाने का भरोसा दिया था और उनसे परीक्षा के फॉर्म भरने की अपील की थी। इसके बाद शिक्षकों ने अपना आंदोलन स्थगित किया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में दोबारा प्रदर्शन करने का विकल्प खुला रखा है। टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग अब भी विवाद का मुख्य विषय बनी हुई है।

सरकार ने परीक्षा के तरीके को लेकर भी बदलाव का फैसला किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह कदम शिक्षकों की मांगों के बीच उठाया गया था, लेकिन इससे विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। शिक्षकों की मुख्य मांग परीक्षा के माध्यम को बदलने के बजाय टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की है।

शुरुआत में परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी ईएसबी को दी गई थी। इसके तहत 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की गई थी, लेकिन ऑफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसी कारण तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नहीं हो पाई। ऑफलाइन परीक्षा में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर के बजाय कागज पर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसके लिए परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी संसाधनों की अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।

अब परीक्षा कराने के लिए दूसरी एजेंसी की तलाश की जा रही है। हायर एजुकेशन बोर्ड के माध्यम से दिसंबर में परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी बताई गई है। हालांकि, यह योजना अभी तैयारी के स्तर पर है और परीक्षा की नई तारीख या आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने परीक्षा की तारीख और अनिवार्यता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। आवेदन के आंकड़े बताते हैं कि तारीख बढ़ाने और परीक्षा के तरीके में बदलाव के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक पंजीयन से दूर हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *