October 6, 2026

छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में हुए चर्चित गोलीकांड के आरोपी शालिगराम गर्ग उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिगराम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने उन्हें 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने पहले से सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद अब शालिगराम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

शालिगराम गर्ग के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर छतरपुर के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमला किया था। शिकायत के मुताबिक घटना के दौरान गोली भी चलाई गई थी और एक गोली मोतीलाल के सीने में जाकर फंस गई थी। घायल मोतीलाल का जिला अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था जिसके बाद गोली निकाल दी गई थी। इस मामले में रघुराजनगर थाना पुलिस ने जांच के बाद शालिगराम को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था।

जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शालिगराम की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित दवे ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शालिगराम को राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के चलते मामले में फंसाया गया है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि आरोपी को बदनाम करने के उद्देश्य से उसके खिलाफ मामला बनाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई के निर्देश दिए।

पूरा मामला जुलाई 2026 में सामने आया था। मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि शालिगराम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घर से बाहर खींचकर लाठी डंडों से पीटा गया। इसके बाद गोली चलाए जाने का आरोप लगाया गया। मोतीलाल के सीने में गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।

मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई थी। पुलिस जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। एक तस्वीर में शालिगराम के हाथ में हथियार दिखाई देने का दावा किया गया था। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और बाद में शालिगराम को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में जमीन विवाद की बात भी सामने आई थी। घायल मोतीलाल ने आरोप लगाया था कि शालिगराम उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। हालांकि यह आरोप मामले की शिकायत और बयान का हिस्सा हैं और अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इन पर निर्णय होना बाकी है।

मामले पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि शालिगराम गर्ग से उनका कोई संबंध नहीं है और वह इस बात को पहले भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने घटना को लेकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही थी। फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालिगराम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

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