फर्जी पासपोर्ट रैकेट में बड़ा खुलासा 70 में करीब 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन गवाहों से बने पैसों के लेनदेन की जांच तेज
जांच के अनुसार विदिशा की एसबीआई शाखा में वर्ष 2021-22 के दौरान यह बैंक खाता खोला गया था। खाता बौद्ध भिक्षु गुलाब राय गौतम के नाम पर दर्ज है लेकिन इसमें रियाल चौधरी का मोबाइल नंबर इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक इस खाते का इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े पैसों के लेनदेन के लिए किया जाता था। जांच एजेंसी अब खाते की पूरी बैंक स्टेटमेंट और उससे जुड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी खंगाल रही है।
एसटीएफ के अनुसार रियाल चौधरी ने गुलाब राय गौतम से यह बैंक खाता हर महीने 10 हजार रुपए किराए पर लिया था। फर्जीवाड़े से मिलने वाली रकम पहले इसी खाते में जमा होने की बात सामने आई है। इसके बाद दस्तावेज तैयार कराने और पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल लोगों के खातों में रकम भेजी जाती थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खाते से किन लोगों को भुगतान किया गया और इस नेटवर्क में पैसों का पूरा रास्ता क्या था।
जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक मध्य प्रदेश में चिह्नित 70 फर्जी पासपोर्ट में से करीब 50 पासपोर्ट केवल तीन लोगों की गवाही के आधार पर जारी हुए। इन नामों में गया प्रसाद गौतम गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मैतानंद शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार अधिकांश पासपोर्ट आवेदनों में इन्हीं लोगों से जुड़े मोबाइल नंबर दर्ज थे और पते के तौर पर बौद्ध मठों का इस्तेमाल किया गया था।
एसटीएफ ने अब तक इस मामले में बांग्लादेशी नागरिकों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले बिचौलियों और कथित तौर पर मदद करने वाले लोगों समेत 75 आरोपियों को चिह्नित किया है। इनमें से 19 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इन फरार आरोपियों पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। इनमें डबरा के गुलाब राय समेत भोपाल और बैतूल से जुड़े आरोपी शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार बैतूल भोपाल छिंदवाड़ा के पांढुर्णा और डबरा के मठों के पतों का इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट बनवाने में किया गया। भोपाल के अन्नानगर से 40 डबरा से 17 बैतूल के आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा पांढुर्णा क्षेत्र से 2 मामलों की पहचान की गई है।
अब एसटीएफ पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों के सत्यापन और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं। फरार आरोपियों की तलाश में एसटीएफ की टीमें असम महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश दिल्ली और पंजाब तक भेजी गई हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क से जुड़े लोगों और पैसों के पूरे लेनदेन की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
