November 4, 2026

धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बाद भी नहीं थमा विवाद, दामोदर यादव बोले- 1000 गाड़ियों के साथ करेंगे तालाबंदी

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उज्जैन । भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में विरोध का सिलसिला लगातार तेज हो रहा है। आजाद समाज पार्टी की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य दामोदर यादव ने मध्यप्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए 14 नवंबर तक बागेश्वर धाम का आश्रम सील करने और वहां होने वाली कथाओं को बंद कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने तय समय तक कार्रवाई नहीं की तो 15 नवंबर को वे अपने समर्थकों के साथ करीब 1000 गाड़ियों में बागेश्वर धाम पहुंचेंगे और आश्रम में ताला लगाएंगे।

मंगलवार को उज्जैन पहुंचे दामोदर यादव ने टावर चौक स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास सभा को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की। यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री महाकाल की नगरी उज्जैन से जुड़े हैं और स्वयं को कृष्णवंशी बताते हैं। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में उन्हें गंभीरता दिखाते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि 14 नवंबर तक आश्रम को सील कर कथाओं पर रोक लगाई जाए। ऐसा नहीं होने पर समर्थक खुद बागेश्वर धाम पहुंचकर तालाबंदी करेंगे।

दामोदर यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वे संविधान मानवता और भाईचारे में विश्वास रखते हैं। लेकिन उनके इस रुख को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी से समाज के लोगों में नाराजगी है और सरकार को उनकी भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बागेश्वर धाम को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 29 अक्टूबर को शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हुई थी। कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप उनकी मुद्रा बांसुरी बजाने के अंदाज और वृंदावन से जुड़ी बातों पर ब्रज के कुछ संतों कृष्ण भक्तों और यादव समाज के लोगों ने आपत्ति जताई थी। लोगों का कहना था कि धार्मिक मंच से भगवान श्रीकृष्ण को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 नवंबर को वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का भेद करना उनका उद्देश्य नहीं था। यदि उनकी बातों से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी को दोनों भगवानों की लीलाओं के अंतर को व्यंग्यात्मक तरीके से समझाने का प्रयास बताया था।

हालांकि धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बाद भी विरोध पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। दामोदर यादव की चेतावनी ने अब मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ धार्मिक टिप्पणी को लेकर नाराजगी जताई जा रही है तो दूसरी तरफ सरकार से कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल 14 नवंबर की समय सीमा और 15 नवंबर को प्रस्तावित तालाबंदी के ऐलान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

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