पुलिसकर्मियों पर वकील को पीटने का आरोप: कीचड़ में पटककर डंडे बरसाने की शिकायत रात 3 बजे तक थाने का घेराव
शिकायतकर्ता अधिवक्ता राकेश रावल ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 8 बजे वह खटलापुरा मंदिर की तरफ से अपने वाहन से आ रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उनका वाहन रोक लिया और उन्हें थाने चलने के लिए कहा। रावल के मुताबिक उन्होंने पुलिसकर्मियों को बताया कि उनके वाहन में पेट्रोल नहीं है। आरोप है कि इसी बात को लेकर पुलिसकर्मियों ने उनके साथ गाली गलौज शुरू कर दी। उन्होंने जब इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें कीचड़ में पटक दिया गया और डंडों से पीटा गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में वकील जहांगीराबाद थाने पहुंच गए। देखते ही देखते थाने के बाहर अधिवक्ताओं की भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि यदि किसी अधिवक्ता के साथ पुलिसकर्मियों ने गलत व्यवहार किया है और मारपीट की गई है तो मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वकीलों ने थाना प्रभारी राजन अहिरवार और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान वकीलों की ओर से एक वीडियो भी जारी किया गया। इसमें शिकायतकर्ता अधिवक्ता राकेश रावल के पैरों पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। उनके कपड़े भी कीचड़ से सने हुए नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारी वकीलों ने इन चोटों को कथित मारपीट से जोड़ते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि पूरे मामले में पुलिस का पक्ष और घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच अभी सामने आना बाकी है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि घटना के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। पुलिस की ओर से मामले के तथ्यों की जांच की जा रही है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वकीलों के देर रात तक थाने पर प्रदर्शन के कारण जहांगीराबाद क्षेत्र में भी हलचल बनी रही। अधिवक्ताओं का कहना था कि उनके साथी के साथ हुई घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर पुलिस अधिकारी मामले की जानकारी जुटाने की बात कह रहे हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किस स्तर तक होती है। फिलहाल अधिवक्ताओं के प्रदर्शन और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए मारपीट के आरोपों को लेकर मामला चर्चा में है।
