September 21, 2026

MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला

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आगर मालवा।
आगर-मालवा जिले (Agar-Malwa district) के नलखेड़ा (Nalkheda) स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर (Siddha Peeth Maa Baglamukhi Temple) के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद मंदिर में रात 8 बजे बाद हवन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. शासन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अब मंदिर में हवन रात 8 बजे से पहले ही किए जा सकेंगे।

शनिवार को तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया था. इसी दौरान श्रद्धालुओं से भरी एक कार तेज बहाव में बह गई. हादसे में कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ोद का निवासी था. मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल थे।

हादसे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे. इसी के बाद अब रात 8 बजे के बाद हवन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के सात श्रद्धालु उज्जैन दर्शन के लिए आए थे. इसके बाद उन्होंने कार किराए पर ली और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे. शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास स्थित बरसाती नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया।

बताया गया कि कार पुलिया के पास तेज बहाव की चपेट में आ गई और करीब 100 मीटर दूर तक बह गई. नलखेड़ा में उस दौरान पिछले 24 घंटे में करीब 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

हादसे का पता शनिवार सुबह चला, जब स्थानीय लोगों ने नाले में पलटी हुई कार देखी. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. SDRF की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया और उसमें सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए. शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया. बाद में प्रशासन ने शवों को एंबुलेंस के जरिए उनके गृह क्षेत्र ओडिशा भिजवाया।


मृतकों के गले में लिपटी थी लाल चुनरी

पुलिस के मुताबिक, जब शवों को कार से बाहर निकाला गया तो सभी के गले में माता के आशीर्वाद वाली लाल चुनरी लिपटी हुई थी. बताया गया कि श्रद्धालु रात में हवन-पूजन करने के बाद लौट रहे थे।

मृतकों की पहचान चालक अरुण पिता ब्रदीलाल गोयल निवासी सुदवास, बड़ोद, राधारानी बेहरा (33), ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा (41), रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा (38), कृष्णा राजवीर पिता शिवप्रसाद (13), शिवप्रसाद बेहरा, वी साई स्वस्तिक पिता ज्ञानेंद्र (10) और शाहीरा स्वयं प्रभा पिता शिवप्रसाद (6) के रूप में हुई है. सभी सात श्रद्धालु ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले थे।


CCTV में एक और व्यक्ति भी बहता दिखा

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज बारिश और नाले में अचानक बढ़ा पानी सामने आया है. मंदिर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

CCTV फुटेज में हादसे से पहले करीब 11 बजे एक व्यक्ति पैदल तेज बहाव वाले रास्ते को पार करता दिखाई दिया. बताया गया कि वह भी नाले के बहाव में बह गया. फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पाया है।


हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

हादसे के बाद नलखेड़ा में लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे और अंबेडकर चौराहे पर चक्काजाम किया. दुकानों को भी बंद कराया गया।

स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे से 12 बजे तक तेज बारिश के दौरान जब मंदिर मार्ग का नाला उफान पर था, तब वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. आरोप है कि नाले के दोनों ओर बेरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा जवान भी मौजूद नहीं थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तेज बहाव के दौरान रास्ते को बेरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया जाता या सुरक्षा जवान तैनात रहते तो हादसे को रोका जा सकता था. हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी और कारणों को लेकर पुलिस-प्रशासन की जांच जारी है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की. ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी घटना पर शोक जताया।

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