August 27, 2026

सिर्फ भाई की कलाई नहीं भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व

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नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच प्रेम स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख समृद्धि तथा लंबी उम्र की कामना करती है। लेकिन भारत के अलग अलग हिस्सों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई ऐसी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएं भी हैं जो इस त्योहार को और खास बनाती हैं। इन्हीं में से एक है भाभी के लिए लुंबा राखी बांधने की परंपरा। सामान्य राखी से अलग दिखाई देने वाली लुंबा राखी खास तौर पर भाभी के लिए तैयार की जाती है और इसे कलाई के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जाता है।

लुंबा राखी का डिजाइन इसकी सबसे खास पहचान होता है। इसमें मोतियों लटकन कुंदन सजावटी धागों और अन्य खूबसूरत चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य राखी की तरह इसे सीधे कलाई पर बांधने के बजाय भाभी की चूड़ियों या कंगन के साथ लटकाया जाता है। यही वजह है कि यह देखने में राखी और पारंपरिक आभूषण का खूबसूरत मेल लगती है। अलग अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके डिजाइन और इसे पहनने का तरीका अलग हो सकता है।

अब सवाल उठता है कि आखिर भाभी को लुंबा राखी क्यों बांधी जाती है। दरअसल कुछ पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भाभी को परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में उसकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसी रिश्ते को सम्मान देने के लिए कई परिवारों में बहन भाई के साथ भाभी को भी रक्षाबंधन के उत्सव में शामिल करती है। ननद द्वारा भाभी को लुंबा राखी देना उनके बीच स्नेह अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाने वाली परंपरा के रूप में देखा जाता है।

इस परंपरा का एक भावनात्मक पक्ष यह भी है कि भाई और उसकी पत्नी को परिवार में एक साथ सम्मान और अपनापन दिया जाए। रक्षाबंधन केवल भाई बहन के रिश्ते तक सीमित न रहकर परिवार के दूसरे रिश्तों को भी प्रेम के धागे से जोड़ने का अवसर बन जाता है। लुंबा राखी इसी भावना का प्रतीक मानी जाती है। इसके जरिए ननद अपनी भाभी के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करती है और दोनों के रिश्ते में अपनापन बढ़ाने का अवसर मिलता है।

हालांकि यह समझना जरूरी है कि लुंबा राखी बांधने की परंपरा पूरे भारत में एक समान नहीं है। यह विशेष रूप से कुछ समुदायों क्षेत्रों और परिवारों में अधिक प्रचलित है। इसलिए इसे रक्षाबंधन की अनिवार्य रस्म नहीं माना जाता बल्कि क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के तौर पर समझना बेहतर है। जिन परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है वहां लुंबा राखी त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती है।

इस तरह रक्षाबंधन पर लुंबा राखी केवल एक खूबसूरत सजावटी राखी नहीं है बल्कि यह रिश्तों को सम्मान देने और परिवार में प्रेम तथा अपनापन बढ़ाने का माध्यम भी बनती है। भाई की कलाई पर बंधी राखी जहां भाई बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है वहीं भाभी की चूड़ियों पर सजी लुंबा राखी ननद भाभी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान की खूबसूरत कड़ी जोड़ती है।

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