पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील
पेजेशकियान ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती थी। उनका कहना है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और तनाव को कूटनीतिक माध्यमों से कम करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, उनके मुताबिक दूसरी ओर से सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके बाद हालात तेजी से बदल गए। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर सैन्य और राजनीतिक दबाव के बावजूद देश ने अपने फैसलों से पीछे हटने के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। उनके बयान में ईरान की ओर से संघर्ष को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश दिखाई देती है।
ईरानी राष्ट्रपति ने विरोधियों की कथित रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान ज्यादा समय तक दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। उनके अनुसार, सीरिया जैसे हालात पैदा करके 48 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा करने या उसे कमजोर करने की योजना बनाई गई थी। पेजेशकियान ने दावा किया कि यह आकलन गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के दौरान ईरान ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि ईरान आने वाले समय में भी अपने फैसलों और राष्ट्रीय हितों पर कायम रहेगा।
पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं तो बाहरी दबाव और चुनौतियों का सामना करना कम मुश्किल हो सकता है। उनके इस आह्वान को मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों की एकजुटता से बाहरी दबाव का प्रभाव कम किया जा सकता है। ऐसे में पेजेशकियान का संदेश केवल घरेलू जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम देशों के लिए भी राजनीतिक संकेत देता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी पेजेशकियान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनसे संपर्क करना आसान नहीं है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ईरान के मौजूदा नेतृत्व और संकट के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खामेनेई की भूमिका को लेकर ईरानी नेतृत्व की प्राथमिकता भी इस बयान में दिखाई देती है।
पेजेशकियान के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति एक तरफ बातचीत की कोशिशों और युद्ध शुरू नहीं करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी भी दबाव के सामने मजबूती से खड़े रहने का संदेश दे रहे हैं। आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि बातचीत का रास्ता खुलता है तो तनाव कम करने की संभावना बन सकती है, लेकिन सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
