होर्मुज और लाल सागर के बाद ब्लैक सी पर बढ़ी चिंता, भारत ने समुद्री कर्मचारियों के लिए जारी किए सुरक्षा निर्देश
नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब समुद्री मार्गों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मचारियों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने सलाह दी है कि किसी भी समुद्री यात्रा या नई नियुक्ति से पहले संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, रोजगार की शर्तों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इस कदम का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित जोखिमों को कम करना है।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि ब्लैक सी और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में मौजूदा समय में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। युद्ध के कारण व्यावसायिक जहाजों पर हमलों का खतरा बना हुआ है और समुद्री गतिविधियां लगातार प्रभावित हो रही हैं। ऐसे माहौल में जहाजों पर कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सरकार ने विशेष रूप से उन भारतीय नाविकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, जो इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं या नई नियुक्ति के लिए जाने वाले हैं।
हाल के दिनों में यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। उस जहाज पर भारतीय नागरिक भी सवार थे। घटना के बाद कुछ भारतीय सुरक्षित पाए गए, जबकि अन्य की तलाश और स्थिति को लेकर प्रयास जारी रहे। इस घटनाक्रम ने ब्लैक सी क्षेत्र में कार्यरत समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने समय रहते एहतियाती सलाह जारी की है।
एडवाइजरी में नाविकों से कहा गया है कि किसी भी जहाज पर कार्यभार संभालने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, बीमा सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही रोजगार अनुबंध की शर्तों की भी सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं। सरकार का मानना है कि पूर्व तैयारी और सही जानकारी संभावित संकट की स्थिति में जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया है कि अप्रैल 2026 से अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों में कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार लगातार भारतीय नाविकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर रही है। अधिकारियों ने सभी संबंधित एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों से भी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
इस बीच वैश्विक समुद्री व्यापार पहले से ही कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता बनी हुई है, जबकि लाल सागर में भी सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है। अब ब्लैक सी में बढ़ते जोखिम ने वैश्विक शिपिंग उद्योग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समुद्री क्षेत्रों में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार की यह एडवाइजरी भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम मानी जा रही है।
