August 9, 2026

दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत

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नई दिल्ली ।दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन की ओर से उठाए गए नए कदम पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिका ने चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के फैसले का विरोध करते हुए फिलीपींस के साथ खड़े रहने की बात कही है।

स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते रहे हैं। इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के मछुआरे इस क्षेत्र में लंबे समय से मछली पकड़ते रहे हैं और नए नियमों के बाद उनके सामने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

चीन ने एक अगस्त को स्कारबोरो रीफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों में क्षेत्र की देखभाल, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। इसके तहत चीन के कई सरकारी विभाग मिलकर इस समुद्री क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन करेंगे। चीन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और क्षेत्र की सुरक्षा तथा संरक्षण को व्यवस्थित करना है।

चीन ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी सितंबर 2024 में दी थी। अब नए नियमों के जरिए वहां प्रशासनिक और निगरानी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, फिलीपींस को आशंका है कि इन व्यवस्थाओं का असर उसके मछुआरों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

अमेरिका ने चीन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नए नियमों से फिलीपींस के उन मछुआरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। अमेरिका ने चीन से क्षेत्र के आसपास मौजूद देशों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखने की अपील की है।

अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में फिलीपींस के साथ है। इसके साथ ही उसने खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई है। इससे दक्षिण चीन सागर के विवाद में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

स्कारबोरो रीफ को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में समुद्री कानून से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पैनल ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधार नहीं माना था। फिलीपींस ने इस फैसले का समर्थन किया था, जबकि चीन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

2016 के बाद भी दोनों देशों के बीच इस समुद्री क्षेत्र को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए। समय-समय पर समुद्री गतिविधियों, मछली पकड़ने और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर तनाव सामने आता रहा है। स्कारबोरो रीफ पर चीन की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने इसी पुराने विवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है।

मौजूदा घटनाक्रम में चीन अपने नए नियमों को क्षेत्र के संरक्षण और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि फिलीपींस इसे अपने मछुआरों और समुद्री अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। अमेरिका के खुलकर फिलीपींस का समर्थन करने से इस विवाद का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। स्कारबोरो रीफ पर लागू किए गए नए नियमों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

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