UGC Caste Discrimination Rules: मोदी सरकार बनाएगी कमेटी, ब्राह्मण सभा और संतों ने दी प्रतिक्रिया
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यूजीसी जातिगत भेदभाव नियम का मामला
यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 के नए नियमों पर दोबारा विचार एवं समीक्षा करने के लिए मोदी सरकार एक विशेष कमेटी बनाएगी। यह बात केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कही। उच्च शिक्षण संस्थान में जातिगत भेदभाव को रोकने से जुड़े इस नियम को लेकर भारी बवाल हुआ था। जबकि, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नियम पर रोक लगाई थी। वहीं, यूजीसी के नियमों पर सरकार के पुनर्विचार के वादे पर उत्तराखंड के ब्राह्मण महासभा समेत संतों ने प्रतिक्रिया दी है।
यूजीसी विवाद: क्या था ?
दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026 (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026) नियम जारी किया था। यह नियम उच्च शिक्षण संस्थान कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लाया गया था, लेकिन इसे लागू करते ही देशभर में विवाद खड़ा हो गया। इस नियम को लेकर जातिगत विवाद लगातार बढ़ रहा था. इतना ही नहीं देशभर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए।
इसी बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जहां 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इन नए नियम पर रोक लगा दी थी। इसी कड़ी में 5 नवंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो यूजीसी के अधिसूचित किए गए इन नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है। यानी मोदी सरकार अब यूजीसी के जातिगत भेदभाव वाले नियमों पर पुनर्विचार करेगी। यह कमेटी सुनिश्चित करेगी कि नियमों में असंतुलन के कारण किसी भी वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव न हो।
मामले पर उत्तराखंड ब्राह्मण महासभा ने दी प्रतिक्रिया:
वहीं, यूजीसी के जातिगत भेदभाव वाले नियमों पर मोदी सरकार की ओर से पुनर्विचार करने पर उत्तराखंड ब्राह्मण महासभा ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उत्तराखंड ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पदम प्रकाश ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े रेगुलेशन पर पुनर्विचार किया जा रहा है। यह स्वागत योग्य कदम है। भविष्य में ऐसी नियमावली बनाई जाए। जिसमें समाज के प्रत्येक विद्यार्थियों के हितों को ध्यान रखा जाए। उनके हित समान रूप से संरक्षित किया जाए।
काली सेना प्रमुख और शांभवी पीठ पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने बताया कि, आज यूजीसी एक्ट कांटेक्स्ट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी। सरकार के अधिवक्ता बस पुरानी बात, सरकार गंभीर है। इस पर विचार हो रहा है। सरकार टाल कर 2027 तक ले जाएगी और चुनाव बाद सवर्णों को झुनझुना पकड़ा देगी।
आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? आज यानी 5 नवंबर को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 के नए नियमों पर दोबारा विचार एवं समीक्षा करेगी। इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। इस पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में हुई।
वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी की. जिसके तहत यूजीपी नियमों के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने बेंच को अवगत कराया कि सरकार की ओर से मामले की जांच कराई जा रही है। कोर्ट ने कहा कि यह पक्का करना जरूरी है कि हर छात्र के हितों की रक्षा हो और युवा पीढ़ी का ध्यान रखा जाए।
तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि परीक्षा का मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी वर्ग नाखुश या फिर डरा हुआ महसूस न करे। छात्रों की हर चिंता दूर की जाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि आप यूजीसी विनियम पर फिर से क्यों सोचते हैं?
इस पर तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि सरकार ने यह फैसला लिया है कि हर छात्र का ध्यान रखा जाए. छात्र को किसी तरह का डर नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार युवा पीढ़ी के हितों पर विचार कर रही है। जिसके लिए एक कमेटी बनाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता की बातों पर ध्यान देते हुए फिलहाल मामले की सुनवाई टाल दी।
