कालाढूंगी की हुंकार: सेवा का दूसरा नाम! गुंजन तिवारी, क्या इस बार बीजेपी बनाएगी अपना सेनापति?
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पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन वाले श्रीमान गुंजन तिवारी क्षेत्र के लोगों की कई वर्षों से कर रहे हैं मदद
कालाढूंगी। राजनीति में पद तो बहुतों को मिलते हैं, लेकिन जनता के दिलों पर राज करने का हुनर किसी-किसी के पास ही होता है। उत्तराखंड की कालाढूंगी विधानसभा सीट पर इस समय एक ऐसा ही नाम हर जुबान पर चढ़ चुका है—गुंजन तिवारी (पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन)। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे गुंजन तिवारी ने अपने सेवा कार्यों और बेदाग छवि से पूरे क्षेत्र में लोकप्रियता की एक नई लहर पैदा कर दी है। आज कालाढूंगी के गांव-गांव, गली-गली में सिर्फ एक ही नारा गूंज रहा है-“हमारा नेता कैसा हो, गुंजन तिवारी जैसा हो!”
‘पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन’: जिसने बदली सेवा की परिभाषा
गुंजन तिवारी जी की सबसे बड़ी ताकत राजनीति नहीं, बल्कि उनका निस्वार्थ सेवा भाव है। पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने क्षेत्र में जो सामाजिक और लोक-कल्याणकारी कार्य किए हैं, उनकी मिसाल आज पूरे कालाढूंगी में दी जाती है।
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सुख-दुख के सच्चे साथी: गरीबों की मदद हो, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हो या किसी असहाय की लाठी बनना हो—पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के जरिए गुंजन तिवारी ने कभी किसी को अपने दरवाजे से खाली हाथ नहीं लौटने दिया।
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जन-जन का अटूट विश्वास: क्षेत्र के लोग उन्हें सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं देखते, बल्कि उन्हें अपने परिवार का एक जिम्मेदार सदस्य मानते हैं जो हर सुख-दुख में सबसे पहले आकर खड़ा होता है।
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युवा जोश, आधुनिक विजन और जनता का अटूट समर्थन
गुंजन तिवारी के पास कालाढूंगी के विकास का एक विजनरी रोडमैप है। वह क्षेत्र में पर्यटन, बेहतर शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं के स्वावलंबन को लेकर पूरी तरह समर्पित हैं। युवाओं में उन्हें लेकर एक अलग ही क्रेज देखने को मिल रहा है, तो वहीं बुजुर्गों का आशीर्वाद उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है।
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चाय की थड़ियों से लेकर सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स तक, आज हर कोई कह रहा है कि बीजेपी को इस बार एक ऐसे जमीनी और कर्मठ चेहरे को मौका देना चाहिए जो सही मायनों में जनता की आवाज बन सके। और इस कसौटी पर गुंजन तिवारी पूरी तरह खरे उतरते हैं।
अब हर किसी की नजरें बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, लेकिन कालाढूंगी की जनता ने तो अपना फैसला सुना दिया है—अबकी बार, गुंजन तिवारी सरकार!
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सिर्फ वादे ही नहीं अपनी माटी और संस्कृति के भी सगे : “From Selfless Service to Political Vision: Why Kaladhungi is Rooting for Gunjan Tiwari (Pushpa Memorial Foundation)!”

इसके अलावा उत्तराखंड की देवभूमि अपनी समृद्ध लोक-कला, संस्कृति और पारंपरिक धरोहरों से पहचानी जाती है। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में जब हमारी ये धरोहरें पीछे छूट रही थीं, तब कालाढूंगी की माटी से एक ऐसा लाल उठ खड़ा हुआ, जिसने राजनीति से ऊपर उठकर न केवल लोगों की सेवा में जुटा है, बल्कि हमारी लोक-कला और संस्कृति को अपने सीने से लगा लिया। यह नाम है—गुंजन तिवारी (पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन)।
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खास बात ये भी है कि जो लोग अब तक गुंजन तिवारी को सिर्फ एक राजनेता या सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में देखते थे, आज वे उनकी संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम को देखकर उनके मुरीद हो चुके हैं। आज कालाढूंगी के हर गांव, हर चौपाल में एक ही बात गूंज रही है—“जो हमारी संस्कृति का सम्मान करेगा, वही कालाढूंगी पर राज करेगा!”
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पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन: जहाँ उत्तराखंड की संस्कृति को भी मिलता है नया जीवन

गुंजन तिवारी ने सिर्फ वादे नहीं कर रहे हैं, बल्कि पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के माध्यम से उत्तराखंड से पलायन रोकने, नशा मुक्ति, बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा उठाने, सस्ता इलाज दिलवाने के अलावा हमारी पारंपरिक कलाओं को घर-घर तक पहुँचाने (स्वरोजगार के लिए ब्याजमुक्त ऋण देकर) में भी मदद कर रहे हैं।
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“जो अपनी माटी का सगा है, वही हमारा सगा है!”
कालाढूंगी के कई बुजुर्गों का कहना है कि नेता बहुत आए और गए, लेकिन अपनी लोक-कला और संस्कृति को इस तरह सहेजने वाला विजनरी युवा आज तक नहीं देखा। गुंजन तिवारी का मानना है कि “कालाढूंगी का विकास तब तक अधूरा है, जब तक यहाँ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहचान न मिल जाए।”
गुंजन तिवारी की यही ‘माटी से जुड़ी सोच’ उन्हें दूसरों से अलग और बेहद खास बनाती है। यही कारण है कि आज जो लोग उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं भी जानते थे, वे भी उनकी इस सांस्कृतिक मुहिम से जुड़कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे गुंजन तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति नहीं करते, बल्कि वह कालाढूंगी की आत्मा—यहाँ की लोक-कला और संस्कृति—को बचाने के सच्चे पहरेदार हैं।
“Connecting Hearts, Saving Culture: Why Kaladhungi’s Youth and Artists are Rallied Behind Gunjan Tiwari!”
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#कालाढूंगी में ‘कायाकल्प’ के विजन से गरमाई सियासत, युवाओं की पहली पसंद बनकर उभर रहे गुंजन तिवारी
“The Gunjan Wave in Kaladhungi: Pushpa Memorial’s Gunjan Tiwari Emerges as the Public’s Top Choice for BJP!”
