June 13, 2026

‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठी आपत्तियां; 23 जून को होगी अगली सुनवाई

0
untitled-1781343472

मध्‍य प्रदेश । इंदौर स्थित Madhya Pradesh High Court में शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके जन्म और पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की गई, जिससे उनकी वैध शादी को विवादित बनाया जा सके। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका में मौजूद कमियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवश्यक सुधार करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित कर दी।

याचिका में दावा किया गया है कि उनके जन्म रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके पिता द्वारा जन्म संबंधी अभिलेखों में छेड़छाड़ कर उन्हें वास्तविक उम्र से कम दिखाने का प्रयास किया गया। याचिका के अनुसार छोटे भाई के दस्तावेजों को उनके दस्तावेज बताकर प्रस्तुत किया गया, जिससे उनकी आयु को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बालिग हैं और उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में कथित हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ा जब मार्च 2026 में विवाह के बाद उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया। याचिका में कहा गया है कि फिल्म शूटिंग के सिलसिले में केरल प्रवास के दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। विवाह के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस संबंध को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

इसी बीच National Commission for Scheduled Tribes की ओर से विवाह के समय याचिकाकर्ता की उम्र को लेकर आशंका व्यक्त की गई थी। इसके बाद मामले में पुलिस जांच शुरू हुई और उपलब्ध शिकायतों एवं दस्तावेजों के आधार पर युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि उम्र संबंधी विवाद और दस्तावेजों की सत्यता का मुद्दा अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाह को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता और उनके पति ने अदालत से अनुरोध किया है कि मूल जन्म प्रमाण पत्र को बहाल किया जाए तथा रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता P. V. Dinesh वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने याचिका में तकनीकी खामियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि की स्पष्टता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद अदालत के समक्ष जन्म प्रमाण पत्र की मूल प्रति प्रस्तुत की गई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को निर्देश दिया कि वे याचिका में मौजूद त्रुटियों को दूर करें और दस्तावेजों की स्पष्ट एवं प्रमाणित प्रतियां रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। अदालत ने इसके लिए 10 दिन का समय प्रदान किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी, जहां संशोधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *