August 8, 2026

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

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मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण अभियान को लेकर मथुरा में हलचल काफी तेज हो गई है। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप देर रात पहुंच गई है। ये विशेष पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगवाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्हीं प्रसिद्ध पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में पत्थरों के आगमन के साथ ही नौ अगस्त से विधिवत कारसेवा और पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया गया है।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए नौ अगस्त को आश्रम से शंखनाद किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के 13 अखाड़ों के साधु-संतों और प्रमुख धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। महाराज ने स्पष्ट किया कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण हेतु कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। पत्थरों की पहली खेप पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य को गति दी जाएगी।

इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए जुलाई माह से ही गतिविधियां जारी थीं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पूर्व में अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में उन्होंने हरिद्वार जाकर वरिष्ठ संतों से मुलाकात भी की थी। इस पहल को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और निर्मोही अखाड़े सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संतों के इस रुख और पत्थरों के आगमन के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से सतर्क हो गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति की समीक्षा के लिए कई बार आयोजकों से बातचीत की थी। हालांकि, आश्रम परिसर में पत्थरों के पहुंचने के बाद संतों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नौ अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में संतों का बड़ा जमावड़ा होने की उम्मीद है, जहां से आगामी रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

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