FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम
अब तक अगर किसी वाहन मालिक को FASTag का बैंक बदलना होता था, तो उसे पुराने FASTag को वाहन से हटाकर नया टैग लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय और अतिरिक्त खर्च दोनों होते थे। OneTag सुविधा के जरिए इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह होगी, जिसमें नंबर वही रहता है और केवल सेवा प्रदाता बदला जाता है।
इस सुविधा की शुरुआत मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान की गई। नई व्यवस्था में वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा मौजूदा FASTag स्टिकर ही इस्तेमाल होता रहेगा। FASTag ID में भी बदलाव नहीं होगा। इससे बार-बार नया टैग लेने की आवश्यकता कम होगी और वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलना अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
FASTag को नए बैंक में पोर्ट करने के लिए वाहन मालिक को सबसे पहले अपने मोबाइल में राजमार्गयात्रा ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करके यह जांचना होगा कि FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए वाहन पात्र है या नहीं।
पात्रता की पुष्टि होने के बाद मौजूदा FASTag बैंक की ओर से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर छह अंकों का वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा। इस कोड को ऐप में दर्ज करने के बाद वाहन मालिक अपनी पसंद का नया FASTag इशूअर बैंक चुन सकेगा। इसके बाद नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होते ही FASTag पोर्टेबिलिटी पूरी हो जाएगी।
हालांकि, बैंक बदलने के बाद तुरंत दोबारा पोर्टेबिलिटी की सुविधा नहीं मिलेगी। अगर कोई यूजर भविष्य में फिर किसी दूसरे बैंक में FASTag पोर्ट करना चाहता है, तो उसे छह महीने तक इंतजार करना होगा। सफल पोर्टेबिलिटी के बाद पुराना बैंक मौजूदा FASTag वॉलेट बंद करेगा और उसमें बची राशि को रिफंड करेगा। इसके बाद छह महीने का कूलिंग पीरियड लागू रहेगा।
फिलहाल OneTag पोर्टेबिलिटी कुछ चुनिंदा बैंकों और इशूअर्स के जरिए उपलब्ध कराई गई है। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एयरटेल पेमेंट बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।
इस सुविधा से FASTag व्यवस्था में भी बदलाव की उम्मीद है। नया टैग बनाने, उसकी डिलीवरी और उससे जुड़े खर्च कम होने के साथ पुराने FASTag को ही जारी रखने की सुविधा मिलेगी। इससे वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया सरल होगी और FASTag के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
