भारत में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों की संख्या और संपत्ति दोनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत में उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या सालाना आधार पर लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 3.9 लाख के करीब पहुंच गई। इसी अवधि में उनकी कुल वित्तीय संपत्ति में भी 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा लगभग 1.64 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल संपत्ति मूल्य में बढ़ोतरी का परिणाम नहीं है, बल्कि देश में निवेश के बढ़ते अवसरों और आर्थिक विस्तार का भी संकेत है।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 में मजबूत प्रदर्शन किया। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने से उद्योग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को व्यापक समर्थन मिला। आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा और पूंजी बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहा। इसका सीधा लाभ उन निवेशकों को मिला जिनकी बड़ी हिस्सेदारी शेयर बाजार और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में थी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निवेशकों की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। पारंपरिक निवेश विकल्पों के साथ-साथ अब व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप निवेश समाधान, वैकल्पिक परिसंपत्तियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं लोकप्रिय हो रही हैं। वित्तीय सलाह और निवेश रणनीति में तकनीक की बढ़ती भूमिका ने संपत्ति प्रबंधन के तरीके को भी बदल दिया है।
वैश्विक स्तर पर भी वर्ष 2025 संपन्न वर्ग के लिए काफी सकारात्मक रहा। दुनिया भर के उच्च संपत्ति वाले लोगों की कुल संपत्ति में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस वृद्धि का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहां संपत्ति और उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या दोनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। जापान, चीन, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस क्षेत्रीय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजारों में मजबूती, महंगाई में नरमी और तकनीकी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने वैश्विक संपत्ति निर्माण में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी ने निवेशकों को उल्लेखनीय लाभ पहुंचाया। इसका असर भारत समेत कई देशों में संपन्न वर्ग की वित्तीय स्थिति पर दिखाई दिया।
रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों को इस वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मिला क्योंकि उनके निवेश सार्वजनिक बाजारों और बेहतर प्रदर्शन करने वाली निजी परिसंपत्तियों में केंद्रित रहे। वहीं निवेश पोर्टफोलियो में शेयरों और निश्चित आय वाले निवेश साधनों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो निवेशकों की संतुलित रणनीति को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति बनी रहती है और पूंजी बाजारों में स्थिरता कायम रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश में संपन्न वर्ग की संख्या और उनकी कुल संपत्ति दोनों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह रुझान भारत को वैश्विक संपत्ति निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
