सदियों पुरानी परंपरा: त्रियुगीनारायण मंदिर में भगवान विष्णु को जौ की हरियाली की गई अर्पित
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वामन द्वादशी मेले में श्रद्धालुओं को बांटा जाएगा प्रसाद
रुद्रप्रयाग में स्थित भगवान शिव और माता पार्वती की पावन विवाह स्थली के रूप में विख्यात त्रियुगीनारायण मंदिर में ऐतिहासिक हरियाली मेला धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान पूरी केदारघाटी पौराणिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति के रंग में डूबी नजर आई. पर्व में स्थानीय लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से जौ की हरियाली की विशेष पूजा-अर्चना की और उसे सर्वप्रथम भगवान विष्णु को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया. हरियाली मेले को लेकर भी क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया. इस मौके पर पौराणिक गीतों और जयकारों से पूरा क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो उठा.
विकासखंड ऊखीमठ की सीमांत ग्राम पंचायत त्रियुगीनारायण में वामन द्वादशी पर्व से पूर्व पौराणिक परंपराओं के अनुरूप धुर्वाष्टमी के अवसर पर हरियाली पर्व धूमधाम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया. ग्रामीणों ने घरों में विधि-विधान से उगाई गई जौ की हरियाली को भगवान विष्णु को अर्पित किया. इसके बाद हरियाली को गांव के प्रत्येक घर में पहुंचाकर एक-दूसरे को भेंट किया गया और बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया गया.
न्याय पंचायत फाटा क्षेत्र के त्रियुगीनारायण गांव में हरियाली पर्व को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह नजर आया. परंपरा के अनुसार ग्रामीण महिलाओं ने सात दिन पूर्व अपने-अपने घरों में जौ की हरियाली उगाई थी. पर्व के दिन हरियाली को विधिवत एकत्र कर वेद मंत्रोच्चार के बीच त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचाया गया. मंदिर में पुजारी ने हरियाली का विधि-विधान से पूजन कराया. इसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु के चरणों में हरियाली अर्पित की गई.पूजन के उपरांत ग्रामीण हरियाली को अपने गांव के प्रत्येक घर में लेकर पहुंचे.
इस दौरान बुजुर्गों को हरियाली भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया गया. ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा गांव की धार्मिक आस्था के साथ ही आपसी भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है. हरियाली को शुभता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक मानते हुए ग्रामीण इसे श्रद्धापूर्वक अपने घरों में स्थापित करते हैं. त्रियुगीनारायण में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध वामन द्वादशी मेले में भी इस हरियाली का विशेष महत्व है. पर्व के दौरान तैयार की गई हरियाली को प्रसाद के रूप में मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा. इससे स्थानीय पौराणिक परंपरा और धार्मिक आस्था को आगे बढ़ाने का संदेश भी मिलेगा.
ये है पौराणिक कथा:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने जब वामन अवतार लिया था, तो उससे ठीक चार दिन पहले उन्होंने माता अदिति और देव कन्याओं को अपने अद्भुत विराट रूप के दर्शन कराए थे. भगवान विष्णु के इस दिव्य रूप से प्रसन्न और भावुक होकर माता अदिति व देव कन्याओं ने उन्हें जौ की हरियाली भेंट की थी. तभी से लेकर आज तक भगवान नारायण को सबसे पहले जौ की हरियाली अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है.
