पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ और ‘स्वरोजगार’ के विजन को अपने निजी खर्च से ज़मीन पर साकार कर रहा ये उत्तराखंड का बेटा
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बिना पद कालाढूंगी का कायाकल्प करने वाले इस उच्च शिक्षित युवा चेहरे को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
कालाढूंगी (उत्तराखंड)। पहाड़ों से पलायन, युवाओं में बढ़ता नशा और आर्थिक तंगी—ये कुछ ऐसी चुनौतियाँ हैं जिन पर राजनीति तो सालों से होती आई है, लेकिन धरातल पर समाधान बहुत कम दिखाई देता है। ऐसे समय में कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसा विजनरी और उच्च शिक्षित चेहरा उभरा है, जिसने बिना किसी सरकारी पद, बजट या एनजीओ के सहयोग के केवल अपने निजी संसाधनों (स्व-वित्त) और अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट अनुभव के बल पर सामाजिक परिवर्तन की नई परिभाषा गढ़ दी है। हम बात कर रहे हैं गुंजन तिवारी (ट्रस्टी, पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन) की, जिनकी निष्काम जनसेवा और दूरदर्शी सोच आज पूरे क्षेत्र में जन-चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
– कॉर्पोरेट के शीर्ष पद से ज़मीन की सेवा तक: उच्च शिक्षा और समृद्ध अनुभव का लाभ
गुंजन तिवारी केवल एक जमीनी कार्यकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि वे एक अत्यंत उच्च शिक्षित और विजनरी पेशेवर (Professional) भी हैं।
– शैक्षणिक योग्यता: उन्होंने विज्ञान में स्नातक (B.Sc.) करने के बाद बिजनेस मैनेजमेंट में MBA और लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री (MPA – Master in Public Administration) हासिल की है।
– कॉर्पोरेट अनुभव: सामाजिक जीवन में आने से पहले वे देश-विदेश की कई नामचीन मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में HR Director (मानव संसाधन निदेशक) जैसे शीर्ष पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में निदेशक का पद, सम्मानजनक वेतन और सुख-सुविधाओं को छोड़कर अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड लौटने के पीछे उनका एक ही उद्देश्य था—अपने ज्ञान, अनुभव और संसाधनों को अपने क्षेत्र के विकास और जन-कल्याण में समर्पित करना। उनका मानना है कि सही मैनेजमेंट और विजन से ही कालाढूंगी की मुख्य समस्याओं का स्थाई समाधान संभव है।
‘मन की बात’ फेम जीवन जोशी का ऐतिहासिक समर्थन: पीएम मोदी के विजन को मिल रही ज़मीनी ताकत–
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ (122वें एपिसोड) के माध्यम से देशभर में पहचान बनाने वाले कालाढूंगी के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व जीवन जोशी ने गुंजन तिवारी के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उन्हें कालाढूंगी के लिए “वरदान” करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपनी प्रबंधन क्षमता (Management Skills) के दम पर गुंजन तिवारी वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘ड्रग-फ्री इंडिया (नशा मुक्त भारत)’ और ‘स्वरोजगार’ के सपनों को किसी सरकारी मदद का इंतज़ार किए बिना, अपनी जेब से धन खर्च करके ज़मीन पर उतार रहे हैं। जीवन जोशी का यह सार्वजनिक समर्थन इस बात का प्रमाण है कि गुंजन तिवारी का यह प्रयास वैचारिक और व्यावहारिक, दोनों स्तरों पर बेजोड़ है।
PM Modi के सपनों को लगे पंख: उत्तराखंड की बेटी को पुष्पा मेमोरियल की कोशिशों ने दिलाया प्रथम स्थान
ज़मीनी बदलाव लाने वाली 4 ऐतिहासिक पहल –
गुंजन तिवारी की जनसेवा केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी चार प्रमुख योजनाओं ने सीधे आम जनजीवन को प्रभावित किया है:
: ‘ब्याज-रहित स्वरोजगार ऋण योजना’ (पलायन पर प्रहार): अपने कॉर्पोरेट अनुभव का उपयोग करते हुए वे युवाओं और स्थानीय परिवारों को अपने ही गांव में छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए 1 वर्ष का पूर्णतः ब्याज-रहित ऋण उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई परिवार आत्मनिर्भर बनकर अपनी जन्मभूमि पर टिके हुए हैं।
: ‘युद्ध नशा विरुद्ध’ और खेल प्रोत्साहन: युवाओं को नशे के चंगुल से निकालने के लिए वे क्रिकेट, फुटबॉल आदि खेलों की किट और सामग्री मुफ्त वितरित कर रहे हैं, जिससे भटकती हुई युवा ऊर्जा को सही दिशा मिल रही है।
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: मेधावी व निर्धन छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति: पैसों के अभाव में किसी होनहार बच्चे की पढ़ाई न छूटे, इसके लिए वे व्यक्तिगत स्तर पर नियमित वजीफा (Scholarship) प्रदान कर रहे हैं।

इसके साथ ही विभिन्न स्कूलों में बच्चों (देश के भविष्य) को शुद्ध जल मिले व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाटर फिल्टर भी इनकी की तरफ से प्रदान किए जाते हैं।
स्कूलों में बच्चों की सेहत के लिए
साथ ही विभिन्न जगहों पर स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया जाता है।
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बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान
* आवास निर्माण व आपातकालीन सहायता: अत्यंत गरीब परिवारों के पक्के मकान बनवाने में आर्थिक मदद के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के इलाज और दूरस्थ क्षेत्रों में मुफ्त मेडिकल कैंप आयोजित कराकर वे हर वर्ग के सुख-दुख के साथी बने हुए हैं।
“कमजोर नहीं, समर्थ और आत्मनिर्भर नेतृत्व”
कालाढूंगी के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है जब किसी व्यक्ति ने मल्टीनेशनल कंपनी के शीर्ष पद की चकाचौंध को छोड़कर जनसेवा को अपना नैतिक कर्तव्य माना है। अपनी निजी कमाई और ज्ञान को जनता के कल्याण में समर्पित करने की इस शैली ने उन्हें एक ‘स्वाभिमानी, पढ़े-लिखे और सक्षम नेता’ के रूप में स्थापित कर दिया है।
क्षेत्रीय बुजुर्गों का आशीर्वाद, महिलाओं का भरोसा और युवाओं का जोश आज गुंजन तिवारी के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।
जनता में एक ही गूंज: “बिना पद के इतना काम, तो विधायक बनने पर कितना?”-
कालाढूंगी के चाय के चौपालों से लेकर कई तरह के प्लेटफॉर्मों व जगहों पर आज एक ही सवाल तैर रहा है—”जो व्यक्ति MBA, MPA और MNC में HR Director रहने के बाद अपनी योग्यता से बिना किसी सरकारी पद या बजट के क्षेत्र का इतना कायाकल्प कर सकता है, उसे यदि जनता का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो कालाढूंगी का विकास किस ऐतिहासिक ऊँचाई पर होगा?”
Pushpa Memorial Foundation: स्वरोजगार के लिए 3 लोगों को दिया ब्याज मुक्त ऋण
जिन युवाओं को मुफ्त खेल किट मिली और जिन परिवारों को ब्याज-रहित कर्ज मिला, उनके संतोषजनक चेहरे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि गुंजन तिवारी अब केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि कालाढूंगी के भावी नेतृत्व के सबसे मजबूत और स्वाभाविक दावेदार बन चुके हैं।

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कालाढूंगी: क्रिकेट के मैदान से स्वरोजगार तक, युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रहे गुंजन तिवारी
One question people have: ‘If someone can do so much on their own without any government position or budget, imagine how much Kaladhungi could develop if they get the chance?’
