September 12, 2026

दूसरों की सिगरेट का धुआं भी ले सकता है जान पैसिव स्मोकिंग को हल्के में न लें बच्चों और दिल के मरीजों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक

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नई दिल्ली । धूम्रपान को हमेशा से सेहत के लिए गंभीर खतरा माना जाता है लेकिन इसका नुकसान सिर्फ सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद लोग भी सिगरेट के धुएं की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता लेकिन आसपास मौजूद व्यक्ति की सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों से निकलने वाले धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है तो इसे पैसिव स्मोकिंग या सेकंडहैंड स्मोकिंग कहा जाता है। यही वजह है कि घर ऑफिस या किसी बंद जगह पर होने वाला धूम्रपान आसपास मौजूद लोगों के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है।

हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक सेकंडहैंड स्मोकिंग से दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। भारत में भी यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में भारत में तीन लाख से अधिक मौतों का संबंध सेकंडहैंड स्मोकिंग से बताया गया। वर्ष 1990 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत बढ़ा है। इस मामले में चीन के बाद भारत का स्थान बताया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि धूम्रपान का धुआं सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए ही नहीं बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी कितना खतरनाक हो सकता है।

पैसिव स्मोकिंग के दौरान व्यक्ति कई तरह के हानिकारक रसायनों के संपर्क में आता है। सिगरेट पीते समय निकलने वाला धुआं आसपास की हवा में फैल जाता है और वहां मौजूद व्यक्ति उसे सांस के साथ शरीर के अंदर ले सकता है। बंद कमरे में इसका खतरा और बढ़ सकता है क्योंकि धुआं लंबे समय तक हवा में मौजूद रह सकता है। लगातार ऐसे वातावरण में रहने से शरीर पर इसका प्रभाव भी बढ़ सकता है।

बच्चों के लिए पैसिव स्मोकिंग विशेष रूप से चिंता का विषय है। धुएं के संपर्क में आने से बच्चों में सांस से जुड़ी समस्याएं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं गर्भवती महिलाओं और हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए भी सेकंडहैंड स्मोकिंग को गंभीर जोखिम माना जाता है। लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

पैसिव स्मोकिंग के तुरंत प्रभाव के तौर पर आंखों में जलन खांसी गले में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों के बीच रहता है तो सांस की गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। सेकंडहैंड स्मोकिंग को हृदय रोग स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी जोड़ा जाता है।

इस खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर को पूरी तरह स्मोक फ्री जोन बनाया जाए। परिवार में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसे घर के अंदर सिगरेट पीने से रोकना चाहिए। बच्चों को विशेष रूप से धुएं से दूर रखना जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों पर भी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखना बेहतर है। साथ ही लोगों को यह समझना होगा कि धूम्रपान का असर केवल धूम्रपान करने वाले तक सीमित नहीं होता। दूसरों के धुएं से बचाव भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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