जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक: सांड ने युवक को पटककर किया घायल, अस्पताल में तोड़ा दम
मृतक की पहचान गोराबाजार निवासी रवि यादव के रूप में हुई है। बताया गया है कि रवि दूध का कारोबार करता था और घटना वाले दिन दूध लेकर हनुमानताल क्षेत्र में आया था। घटना 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। उस समय सड़क पर दो सांड आपस में लड़ रहे थे। सांडों की लड़ाई के कारण सड़क पर यातायात भी रुक गया था। आसपास मौजूद लोग उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान सांडों पर पानी डाला जा रहा था।
इसी बीच रवि वहां से निकल रहा था। अचानक एक सांड ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। सांड ने रवि को अपने सींगों से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद वह सांड उसके ऊपर से गुजर गया और दोनों सांड मौके से भाग निकले। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। रवि काफी देर तक सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा रहा। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे ऑटो से जिला अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल के मुताबिक मृतक दूध व्यवसाय से जुड़ा था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की समस्या एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
नगर निगम के मुताबिक जबलपुर शहर में 20 हजार से अधिक आवारा मवेशी हैं। इन्हें पकड़ने के लिए करीब 80 कर्मचारी लगाए गए हैं और रोजाना 70 से 80 मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन मवेशियों को रखने की है। निगम अधिकारी कुशाग्र सिंह ठाकुर के मुताबिक तिलवारा में करीब 800 रामपुर में 130 और उमरिया में 170 मवेशियों को रखने की क्षमता है। इससे ज्यादा मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
अधिकारी का यह भी कहना है कि कई जगहों पर मवेशियों को पकड़ने के दौरान गौभक्तों की ओर से विरोध या विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे में निगम के सामने एक तरफ शहर की सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की समस्या भी बनी हुई है। रवि यादव की मौत ने इस पूरे इंतजाम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर सड़क पर घूम रहे हजारों आवारा मवेशियों से लोगों की जान कब तक खतरे में पड़ती रहेगी।
