बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद
मटकी फूटने के बाद उसमें रखा माखन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटा गया। भक्तों को माखन के साथ मिश्री और धानी का प्रसाद भी वितरित किया गया। आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आया। मटकी फोड़ने की परंपरा के बाद भगवान द्वारकाधीश की चांदी की पादुकाओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे मंदिर में दिन के समय शयन आरती संपन्न हुई।
मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संजय मालिया के अनुसार यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। जन्माष्टमी के बाद चार दिनों तक भगवान की रात में शयन आरती नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान के सोने और जागने का कोई निश्चित समय नहीं माना जाता। बछ बारस के दिन मटकी फोड़ने के बाद भगवान के शयन की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण साल में एक बार दिन के समय शयन आरती की जाती है।
इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि बच्चों को राधा और कृष्ण के रूप में सजाया गया। मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी परिवार के सदस्य मुख्य द्वार पर पहुंचे और परंपरागत तरीके से मटकी फोड़ कार्यक्रम संपन्न कराया। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चे को देखकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। मटकी फूटने के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए।
गोपाल मंदिर में बछ बारस का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उज्जैन की समृद्ध कृष्ण भक्ति परंपरा को भी दर्शाता है। जन्माष्टमी के उत्सव के बाद होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बाल कृष्ण के हाथों माखन की मटकी फूटने के साथ मंदिर परिसर में उमड़ा उल्लास पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा।
