गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा
29 अगस्त को सीधी के एक व्यक्ति से पुलिस को अहम जानकारी मिली कि वीरेंद्र कुछ साल पहले महाराष्ट्र के राजगढ़ इलाके में काम कर चुका है। पुलिस ने इस सुराग को गंभीरता से लिया और टीम को तत्काल महाराष्ट्र रवाना कर दिया। सीधी से पुलिस टीम ने करीब 1322 किलोमीटर का सफर तय किया। राजगढ़ पहुंचने के बाद पता चला कि वीरेंद्र खिरखिनदीवाड़ी इलाके की एक कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम कर रहा है और कंपनी के पास ही एक झोपड़ी किराए पर लेकर रह रहा है। पुलिस को डर था कि अगर आरोपी को पुलिस की भनक लग गई तो वह दोबारा फरार हो सकता है। इसलिए सीधे उसके ठिकाने पर दबिश देने के बजाय उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों को समझने की रणनीति बनाई गई।
पुलिस को पता चला कि वीरेंद्र कंपनी की गाड़ी लेकर अक्सर पास की एक पंक्चर की दुकान पर आता है। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया। सिर पर गमछा बांधा गया। पैरों में चप्पल पहनी गई और पुराने कपड़े पहनकर वह मजदूर की तरह पंक्चर की दुकान पर पहुंच गए। दुकान संचालक को भी उनकी असली पहचान नहीं बताई गई। थाना प्रभारी ने वहां आम मजदूर की तरह काम करना शुरू कर दिया। कभी गाड़ियों में हवा भरी तो कभी पंक्चर बनाया। इस दौरान पुलिस की बाकी टीम आसपास सादी वर्दी में तैनात रही और आरोपी की हर गतिविधि पर नजर रखती रही।
पुलिस को वीरेंद्र का इंतजार करीब 16 घंटे तक करना पड़ा। आखिरकार 2 सितंबर को वह कंपनी की गाड़ी लेकर उसी पंक्चर की दुकान पर पहुंचा। जैसे ही वीरेंद्र गाड़ी से उतरकर दुकान की ओर बढ़ा पहले से तैयार पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और मौके पर ही दबोच लिया। आरोपी को तत्काल वाहन में बैठाया गया और पुलिस टीम उसे लेकर सीधी रवाना हो गई। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम बात यह रही कि जिस थाना प्रभारी को आरोपी पहचानता था वही उसके सामने मजदूर बनकर कई घंटे तक पंक्चर की दुकान पर काम करता रहा और उसे इसकी भनक तक नहीं लगी।
वीरेंद्र पर अपनी पत्नी और सीधी पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या का आरोप है। दोनों की शादी करीब 22 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। 15 सितंबर 2025 की रात शराब के नशे में दोनों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद मारपीट शुरू हो गई। बच्चों ने डरकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में रखे बेसबॉल के डंडे से सविता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी आधी रात को घर से फरार हो गया।
पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी। उसके ऊपर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। इस दौरान कई राज्यों में दबिश दी गई लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। करीब एक साल में कोतवाली थाने के चार थाना प्रभारी बदल गए। 11 अगस्त 2026 को दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली और एसपी संतोष कोरी ने उन्हें सविता हत्याकांड की फाइल सौंपकर आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। आखिरकार पुलिस की बदली हुई रणनीति काम आई और मजदूर के भेष में पंक्चर की दुकान पर बैठकर बिछाए गए जाल में एक साल से फरार आरोपी फंस गया। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की बात कही है।
