विशेष रिपोर्ट: एक दिग्गज के दबाव में उत्तराखंड भाजपा? कार्यसमिति सदस्यों की सूची में फेरबदल के बाद अंदरूनी कलह तेज!
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सियासी विश्लेषक बोले– ‘डूबता हुआ तारा है पार्टी’
देहरादून। भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों, विशेष आमंत्रित एवं स्थायी आमंत्रित (पदेन) सदस्यों की सूची जारी होने के बाद — उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सांगठनिक सूचियों और प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों के नामों को लेकर खींचतान अब पूरी तरह सतह पर आ चुकी है। चर्चा है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जारी की गई नई कार्यसमिति सदस्यों की सूची में अंतिम समय पर किए गए बड़े फेरबदल ने पार्टी के अंदरूनी गलियारों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, यह पूरा बदलाव उत्तराखंड के ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के भारी दबाव के चलते किया गया है।
अंतिम समय में बदला गया फैसला
चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष द्वारा तैयार की गई शुरुआती सूची में कई नए और जनाधार वाले चेहरों को जगह दी जानी थी। लेकिन जैसे ही सूची अंतिम रूप लेने वाली थी, पार्टी के पुराने नेता ने अपने करीबियों को एडजस्ट करने के लिए हाईकमान और प्रदेश संगठन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इसी दबाव के आगे झुकते हुए संगठन को ऐन वक्त पर कार्यसमिति सदस्यों के नामों में भारी फेरबदल करना पड़ा।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री @mahendrabhatbjp जी की सहमति के उपरांत भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों, विशेष आमंत्रित एवं स्थायी आमंत्रित (पदेन) सदस्यों की निम्नलिखित प्रकार से घोषणा की जाती है।#BJP4UK #BJPUttarakhand pic.twitter.com/AwXDo8mEtd
— BJP Uttarakhand (@BJP4UK) August 9, 2026
‘हार के डर’ के बीच अपने करीबियों को बचाने की होड़…
पार्टी से जुड़े लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिस नेता के इशारे पर यह बदलाव हुए हैं, वह खुद अपनी जमीनी पकड़ काफी हद तक खो चुका है, यहां तक कि उसके क्षेत्र की जनता ही उसके विरोध में कई बार मुखर भी हो चुकी है। क्षेत्र में इन चर्चाओं का भी बाजार गर्म है कि आगामी चुनाव में संबंधित नेता की स्थिति बेहद नाजुक है और उनकी हार तय मानी जा रही है। यहां तक की उनकी उम्र के आसपास के पार्टी से जुड़े रहे कई लोग तक उनके इस बार हराने की बात कर चुके हैं। इसके बावजूद, पुराने रसूख के बल पर फैसले प्रभावित करने की उनकी जिद ने समर्पित कार्यकर्ताओं और निष्ठावान नेताओं में भारी आक्रोश भर दिया है।
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ऐसे में सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कई समर्पित नेता पार्टी को लेकर नाराज हो गए हैं। यहां तक की वे अपना नाम कार्यसमिति के सदस्य में न आने से नाराज होकर आगे कि रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं। ये नेता भाविष्य में बागी होकर पार्टी को सीधे तौर पर बड़ा नुकसान भी दे सकते हैं। वहीं कुछ नेताओं ने तो नाम न छापने की शर्त पर यह तक बताया है कि उन्हें अब पार्टी पर विश्वास ही नहीं रहा। साथ ही इन नेताओं से जुड़े सूत्रों का यह तक कहना है कि पार्टी डेमेज कंट्रोल के तहत इन्हें शांत करने की कोशिश कर सकती है। लेकिन इनमें से कई नेता पार्टी के सामने तो खुद को संतुष्ट दिखाकर अंदरखाने पार्टी को अंतिम समय पर भयंकर चोट दे सकते हैं।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का बड़ा दावा: “भाजपा अब डूबता हुआ तारा”
इस घटनाक्रम के बाद अब राजनीति के कई जानकारों और वरिष्ठ विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड भाजपा जिस दिशा में फैसले ले रही है, वह उसके पतन का कारण (संकेत) बन सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में भाजपा अब एक ‘डूबता हुआ तारा’ साबित होती दिख रही है।
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वहीं कई विश्लेषकों का तो यहां तक मानना है कि यदि संगठन की यही स्थिति रही और फैसलों में यही हठधर्मिता चलती रही, तो आगामी 2027 के चुनावों में पार्टी पूरी तरह सत्ता से बाहर हो जाएगी। ऐसे में पूरी ताकत लगाकर यदि भाजपा बहुमत बना भी लेती है तो स्थिति यहां तक आ सकती है कि भाजपा को महज एक या दो सीटें ही विपक्ष से अधिक जीतने की संतुष्टी करनी पड़े। ऐसी परिस्थिति में यदि पार्टी किसी तरह एक-दो सीटें निकाल भी लेती है, तो भी वह इस स्थिति में नहीं होगी कि अपनी सरकार 5 साल तक बचा सके। विरोधी पार्टियां किसी भी समय सरकार गिराकर स्वयं सत्ता पर काबिज हो सकती हैं।
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कार्यकर्ताओं का टूटा मनोबल, सत्ता परिवर्तन के संकेत…
बताया जाता है कि संगठन के इस फैसले से यह संदेश गया है कि पार्टी जनता के फीडबैक और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर कुछ पुराने नेताओं के दबाव में काम कर रही है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि जिन लोगों का नाम काटा गया है उनमें से कई का मानना है कि एक ओर जहां पीएम मोदी युवाओं को जोड़ने की बात करते हैं, वहीं धामी सरकार के नेताओं के दबाव में उत्तराखंड में युवा नेताओं को पार्टी में स्थान देने से बचा जा रहा है। आम जनमानस में तक यह चर्चा अब आम होती जा रही है कि यदि भाजपा में आंतरिक सुधार नहीं हुआ, तो राज्य से पार्टी का जनाधार बुरी तरह से प्रभावित होगा।
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जानकारों का मानना है कि कार्यकर्ताओं का गिरता मनोबल और दिग्गजों का गुटबाज़ी में उलझना इस बात की ओर साफ इशारा कर रहा है कि उत्तराखंड में इस बार राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि हाईकमान इस अंदरूनी असंतोष पर क्या कदम उठाता है और जिनको संगठन में आने से वंचित किया गया वे इसे किस रुप में लेते हैं या फिर यह अंदरूनी कलह पार्टी के अंत की शुरुआत साबित होगी।
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